करनाल शहर की नई अनाज मंडी में वीरवार को किसानों और आढ़तियों के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार गुरुवार दोपहर को सरकारी खरीद शुरू हो गई। हालांकि, ई खरीद के नाम पर एक भी दाना नहीं बिका। वहीं, मंडी में बिना गेट पास के ही धान से भरी ट्रालियां आ रही हैं। गेट पास के लिए पहुंचे किसानों ने बताया कि तैनात कर्मचारियों ने यहां तक कह दिया कि सीएम के पास जाओ या फिर पीएम के पास, गेट पास यहां नहीं मिलेगा।
अहम बात यह भी है कि न तो धर्म कांटे पर वजन किया जा रहा है और न ही कंप्यूटराइज्ड गेट पास दिया जा रहा है। हालांकि, आढ़ती की दुकान पर पहुंचने और बिकने के बाद आढ़ती 50 रुपये देकर बाद में गेट पास कटवाते हैं। इससे भारी गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। उधर, जैसे ही सरकारी खरीद शुरू हुई तो सरकारी एजेंसियों ने खरीद से पहले किसानों से गेट पास मांगा तो किसानों ने बताया कि गेट पर पास नहीं दिया जा रहा है। इस पर किसानों ने हंगामा भी किया। मीडिया के जाने के बाद जरूर मार्केट कमेटी ने गाड़ियों को नोट करने के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई।
गुरुवार को अमर उजाला टीम ने नई अनाज मंडी का दौरा किया। टीम ने गेट से लेकर खरीद तक और ई खरीद केंद्र का मुआयना किया। मंडी में बिना किसी गेट पास के धान से भारी ट्रालियों को अंदर लाया जा रहा है। मंडी के जीटी रोड स्थित गेट पर जाकर गेट पास देने वाले कंप्यूटर ऑपरेटरों से बात की तो उन्होंने केवल एक ही जवाब दिया कि नेट नहीं चलता, इसलिए गेट पास नहीं दिए जा रहे। जबकि कंप्यूटर में नेट सुचारू रूप से चलता पाया गया। किसानों को धान का गेट पास न मिलने से सरकारी एजेंसी किसानों के धान की सरकारी खरीद नहीं करती। नेट चालू होने के बाद भी गेट पास न देने से मामले में कहीं न कहीं अधिकारियों की मिलीभगत होने की आशंका है। मंडी के गेट पर मात्र खानापूर्ति के लिए एक कागज पर धान लेकर आए किसानों के नाम लिखे जा रहे हैं।
गेट पास न देने पर किसानों में रोष
मंडी के गेट पर गेट पास न दिए जाने के कारण किसानों में भारी रोष है। गेट पास न दिए जाने के कारण मंडी के गेट पर धान से भरी ट्रालियों की लंबी-लंबी लाइनें लग गई। किसान धान के गेट पास लेने के लिए अड़े रहे, जबकि विभाग के कर्मचारी नेट न चलने का बहाना बनाकर किसानों को टालते नजर आए। किसानों का आरोप है कि गेट पास देने वाले कर्मचारी किसानों के साथ अभद्र व्यवहार करते हैं। संजय वासी बड़ागांव ने बताया कि गेट पास नहीं दे रहे। कंप्यूटर खराब का बहाना बनाया जा रहा है। पहले भी वह कई ट्राली ऐसे ही लेकर गए है। बीरबल वासी सर्फाबाद माजरा ने बताया वह सुबह से धान की ट्राली लेकर आए है, लेकिन गेट पर बैठे कर्मचारी नेट नहीं चलने की बता कह रहे है। संदीप वासी दहा ने बताया कि कर्मचारी शराब पीकर बैठते हैं। न तो गेट पास देते हैं और बोलते हैं कि सीएम के पास जाओ चाहे पीएम के बाद लेकिन पर्ची नहीं मिलेगी।
आढ़तियों को आसानी से मिल जाता है पास
मंडी में धान लेकर आए किसानों को गेट पास नहीं मिलता, लेकिन आढ़तियों को आसानी से गेट पास मिल जाता है। सूत्र बताते हैं कि आढ़ती मात्र पचास रुपये देकर आसानी से गेट पास ले लेते हैं, जिससे किसानों को नुकसान हो रहा है। सूत्रों का दावा है कि बिना वाहन आए भी गेट पास कटवाए जाते हैं। जबकि राइस मिलर्स इसका नाजायज फायदा उठा रहे हैं। इस सारे कार्य में अधिकारियों की मिलीभगत होने की पूर्ण आशंका है।
दोपहर तक किया इंतजार
दोपहर बाद शुरू हुई खरीद नई अनाज मंडी में किसानों के लंबे इंतजार के पश्चात वीरवार दोपहर को सरकारी खरीद एजेंसियों ने खरीद शुरू की। खरीद के लिए सुबह से ही आढ़ती और किसान खरीद एजेंसियों का इंतजार करते रहे। लेकिन काफी लंबे इंतजार के बाद ही दोपहर को एजेंसियों के अधिकारी आए और धान की खरीद शुरू की गई। एक तरफ सरकार डिजिटल पर जोर रही है, इस बार ई खरीद के लिए पोर्टल शुरू कर दिया है। हालांकि, पिछली बार भी मंडी के मुख्य गेट पर सीसीटीवी कैमरे लगाने को लेकर बात हुई थी, लेकिन अधिकारियों ने मिलीभगत के चलते अभी तक सीसीटीवी कैमरे नहीं लगवाए। इससे अधिकारियों व व्यापारियों की मंशा को आंका जा सकता है। आखिरकार जब हर जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लग रहे हैं, लेकिन यहां पर ऐसा कुछ नहीं है।
हो रही सेल्स टैक्स की चोरी
नियमों के अनुसार मंडी में आने वाले पांच प्रतिशत सेल्स टैक्स, दो प्रतिशत मार्केट फीस और दो प्रतिशत एचआरडीएफ फीस होती है। जैसे ही एक धान से भरी गाड़ी आई तो उसका गेट पास अनिवार्य है। लेकिन बिना गेट पास कराए ही वाहनों को अंदर कराने को लेकर गड़बड़ की जाती है और मिलीभगत के चलते इस धान को व्यापारियों को बेचा जाता है। इसमें कई टैक्सों की चोरी होती है।
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वर्जन
गुरुवार को जैसे ही सरकारी खरीद शुरू हुई तो एनआईसी की साइट बंद हो गई थी। सर्वर डाउन होने के कारण ऐसा हुआ। इस कारण गेट पास काटने में परेशानी हुई। ऐसे में मैनुवली गेट पास काटने के लिए कर्मचारी तैनात किए गए थे। मंडी में आने वाले हर गाड़ी व धान से भरे वाहनों का नंबर और किसान का नाम नोट किया जा रहा है। गड़बड़ी की सभी बातें आधारहीन है। मंडी में पूरी पारदर्शिता के साथ कार्य हो रहा है।
- चंद्रप्रकाश, मार्केट कमेटी सचिव, करनाल।