माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। फरवरी महीने में बढ़ते तापमान के असर को देखते हुए केंद्र सरकार की ओर से गेहूं पर अंतस्थ तापमान के प्रभाव को कम करने एवं उसके अनुश्रवण के लिए उच्चस्तरीय कमेटी गठित की गई थी। जिसकी बैठक रविवार को करनाल के भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान में आयोजित की गई। जिसमें केंद्रीय कृषि आयुक्त डॉ. पीके सिंह की अध्यक्षता में सर्वाधिक गेहूं उत्पादक हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और राजस्थान के कृषि उच्चाधिकारियों, वैज्ञानिकों के साथ मंथन किया गया। जिसके बाद कृषि आयुक्त ने कहा कि देश के किसानों को घबराने की आवश्यकता नहीं है, देशभर में गेहूं की फसल बहुत अच्छी है। अगेती और समयानुकूल बिजाई वाले गेहूं को अधिक तापमान फिलहाल प्रभावित नहीं करेगा। 15 मार्च के बाद यदि कोई नकारात्मक परिस्थितियां बनती भी हैं तो हम तैयार हैं।
संयोजक एवं भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि इस बार देशभर में 34.23 मिलियन हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की बिजाई हुई है। जिसमें 112 मिलिटन की पैदावार की संभावना है। क्योंकि इस बार मौसम अभी तक पूरी तरह अनुकूल है, कोई बीमारी भी नहीं आई है। देश में कुल बिजाई की 75 प्रतिशत अगेती व समयानुकूल बिजाई हुई है। इसके अलावा 50 प्रतिशत क्षेत्र नई जलवायु अनुकूल किस्मों का है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक (प्रसार) डॉ. रणधीर सिंह, महानिदेशक (बीज) डॉ. डीके यादव, गेहूं विकास निदेशालय बीके सिंह, अपर निदेशक (कृषि) यूपी अखिलेश चंद्र शर्मा, कृषि एवं खेतीबाड़ी विभाग पंजाब के निदेशक डॉ. गुरविंद्र सिंह, डीडीए कुरुक्षेत्र डॉ. प्रदीप मील, संयुक्त निदेशक डब्ल्यूडीडी डॉ. विक्रांत सिंह, सहायक निदेशक डॉ. एसके मीणा और वीडियो कांफ्रेंसिंग से जुड़े मध्यप्रदेश के संयुक्त निदेशक (कृषि) डॉ. जीएस चौहान आदि कई अधिकारियों के साथ मंथन हुआ। तापमान के प्रभाव के पांच राज्यों को ही चिन्हित किया गया है। मंथन के बाद केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के कृषि आयुक्त डॉ.पीके सिंह ने बताया कि जमीन, तापमान, मौसम, गेहूं की किस्मों आदि सभी बिंदुओं पर विस्तृत मंथन के बाद निष्कर्ष निकाला गया है कि जब तक न्यूनतम तापमान 15 और अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तक है, तब तक गेहूं की फसल को कोई नुकसान नहीं है। लेकिन हमें सतर्क रहने की आवश्यकता है।
आवश्यकतानुसार करें हल्की सिंचाई
15 मार्च तक मौजूद इससे ऊपर जाने की संभावना भी नहीं है, लेकिन यदि तापमान इससे ऊपर जाता है तो किसानों को गेहूं की फसल में आवश्यकतानुसार हल्की सिंचाई जरूर करें। इसके अलावा म्यूरेट ऑफ पोटास के 0.2 प्रतिशत घोल यानि 200 लीटर पानी में 400 ग्राम म्यूरेट ऑफ पोटास का दो बार बाली निकलते समय तथा पुष्पन के बाद (पोस्ट एंथेसिस) छिड़काव करें। या फिर पोटेशियम नाइट्रेट का दो प्रतिशत घोल यानि प्रति एकड़ 200 लीटर पानी में 4.0 किग्रा पोटेशियम नाइट्रेट का मिलाकर घोल का दो बार छिड़काव करें।
उन्होंने कहा कि भारतीय मौसम विभाग प्रत्येक मंगलवार को भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान केंद्र करनाल व गेहूं विकास निदेशालय गुरुग्राम फसल सलाह जारी करने के लिए मौसम पूर्वानुमान जारी करेगा। प्रचार प्रसार के लिए कृषि विज्ञान केंद्रों के नेटवर्क, किसान उत्पादक संगठनों, राज्य के कृषि विभाग सहित सभी एजेंसियों को परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा। सांसदों, विधायकों आदि जनप्रतिनिधियों को भी इस मुहिम में शामिल किया जाएगा। संस्थान मीडिया संयोजक राजेंद्र शर्मा ने बताया कि कृषि प्रोद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान लुधियाना, कानपुर, जोधपुर के गेहूं विकास निदेशालय गुरुग्राम के प्रतिनिधियों ने भी सहभागिता की।