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बोगस बिल बनाकर की एक हजार करोड़ की चोरी

Wed, 24 May 2017 11:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल
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आयकर विभाग द्वारा करनाल की अनाज मंडी स्थित एक दुकान पर की गई जांच में अब चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पिछले तीन दिन से गुड़गांव स्थित आयकर विभाग की इंस्वेटिगेशन टीम व करनाल की टीम द्वारा की गई जांच में टैक्स चोरी का मामला 300 करोड़ से बढ़कर एक हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। टीम द्वारा दिल्ली की फर्मों के हस्ताक्षर हुई चेक बुक समेत करनाल की करीब 100 राइस मिलर्स के दस्तावेज बरामद किये हैं। आयकर विभाग के अधिकारियों का दावा है कि हरियाणा में पकड़ी गई यह टैक्स चोरी अब तक की सबसे बड़ी रकम है। हालांकि, बुधवार को भी टीम ने अपनी जांच और कार्रवाही जारी रखी।  दुकान के बाहर पुलिस की टीम तैनात है। किसी को अंदर नहीं जाने दिया जा रहा है और न ही बाहर आने दिया जा रहा है। देर शाम को टीम ने व्यापारी के घर को भी खंगाला और उसके बैंक लॉकर्स की भी जांच की। उधर, आयकर विभाग की इतनी बड़ी कार्रवाई से व्यापारियों में हड़कंप मचा हुआ है।
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गौरतलब है कि नावल्डी रोड पर पुरानी अनाज मंडी स्थित दुकान नंबर 68 मैसेज मित्रसेन राजेश कुमार फर्म के संचालक हितेश जैन द्वारा चावल व्यापारियों को एंट्री प्रोवाइडर का कार्य किया जाता है। गुप्त सूचना के आधार पर तीन दिन पहले करनाल आयकर विभाग की संयुक्त आयकर आयुक्त वंदना मोहिते के नेतृत्व में आईटीओ आरएस शर्मा, एसएल गर्ग व जगवीर सिंह की टीम ने सर्वे के तौर पर यहां जांच शुरू की। जांच के दौरान टीम को हैरान करने वाले दस्तावेज व दिल्ली की करीब 30 फर्जी फर्मों की चेकबुक मिली, जिन पर बकायदा साइन किये हुए थे।

इसके साथ ही 1 करोड़ 11 लाख नकद बरामद किये गए थे, बुधवार को टीम ने ये पैसे सरकार के खाते में जमा करा दिये। मामला बड़ा होने के कारण करनाल आयकर विभाग की संयुक्त आयुक्त वंदना मोहित ने अपने आला अधिकारियों को इस बारे में जानकारी दी। इसके बाद उत्तर पश्चिम क्षेत्र के मुख्य आयकर आयुक्त केसी जैन ने मामले में रेड करने के लिए यह मामला गुड़गांव आयकर विभाग की इंस्वेटिगेशन टीम को सौंपा। सात सदस्यीय टीम ने दुकान पर रेड की और भारी मात्रा में संदिग्ध दस्तावेज बरामद किये। पिछले तीन दिन से चली जांच में आयकर विभाग की टीम ने जो दस्वावेज व लेपटॉप से फाइलें बरामद की हैं, उनसे यह मामला करीब एक हजार करोड़ रुपये की टैक्स चोरी का है। आयकर विभाग के अधिकारियों का दावा है कि यहां पर पूरे तौर पर फर्जी चावल खरीद के पास बनाए जाते थे, जबकि कोई चावल न तो खरीदा जाता था और न ही बेचा जाता था।
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यूं किया फर्जीवाड़ा
दरअसल हरियाणा में चावल पर 5 प्रतिशत वैट और 4 प्रतिशत मंडी टैक्स है। हितेश जैन द्वारा मंडी में ही एंट्री प्रोवाइडर का काम किया जाता है, ऐसे में जिले भर के राइस मिलर्स जैन के संपर्क में हैं। जैन द्वारा दिल्ली की कई फर्जी फर्में बनाई गई और बकायदा उनके करनाल के बैंकों में खाते खोले गए। करनाल के राइस मिलर्स द्वारा दिल्ली में ही धान व चावल की खरीद दिखाई गई और दिल्ली में ही बिक्री दिखाई गई, जबकि असल में न तो चावल खरीदे गए और न ही बेचे गए। हकीकत में चावल हरियाणा की मंडियों से ही खरीदे और बेचे गए। टैक्स से बचने के लिए राइस मिलर्स की मिलीभगत से इस कार्य को अंजाम दिया गया।

फर्जी बिल के लेता था प्रति क्विंटल 2 रुपये
जांच टीम ने यह भी बताया कि हितेश जैन को फर्जी बिल तैयार करने के लिए प्रति क्विंटल दो रुपये मिलते थे। यह राशि राइस मिलर्स उसे देते थे। जैन का कार्य मात्र इतना था कि वह दिल्ली की फर्जी फर्मों के नाम पर बिल काटता था और उनके करनाल में खुद के द्वारा ही खोले गए खातों में राशि का लेन देन दिखाता था, जबकि खातों वह खुद ही आपरेट करता था। जांच में दुकान पर पिछले दो साल का रिकार्ड मिला है, हो सकता है कि मामला पिछले कई साल से चल रहा हो।

देखिये अभी जांच जारी है, एक्चुवल आंकड़ा अभी कुछ नहीं बताया जा सकता। फिलहाल इतना ही कहा जा सकता है कि यह कई सौ करोड़ रुपये की टैक्स चोरी का मामला है। दिल्ली व अन्य प्रदेशों की मिली फर्मों के खातों की जांच के बाद कुल आंकड़े पर पहुंचा जा सकता है, यह लंबा प्रोसेस है। फिलहाल इंवेस्टिगेशन टीम व्यापारी के प्रतिष्ठान पर जांच कर रही है।
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-वंदना मोहिते, सहायक आयुक्त, आयकर विभाग।
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