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लूट व स्नैचिंग के दोनों मामले निकले झूठे : अस्पताल के चपरासी ने रची थी पैसे हड़पने की साजिश, दूसरे मामले में मजबूत केस बनवाने को

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अमर उजाला ब्यूरो
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करनाल (घरौंडा)। बीते दिनों जीटी रोड पर बसताड़ा फ्लाईओवर के नीचे और उसके समीप हुई मारपीट कर 4.70 लाख रुपये लूटने की दोनों वारदातें झूठी निकलीं। पहले मामले में निजी अस्पताल के चपरासी ने एक लाख 80 हजार रुपये हड़पने के लिए अपने दो दोस्तों के लिए मारपीट कर लूट की झूठी कहानी बनाई थी तो वहीं व्यापारी अनुज जैन ने कार को साइड न देने को लेकर हुई मारपीट के मामले को मजबूत बनाने के लिए दो लाख 90 हजार व सोने की चेन स्नैचिंग के झूठे आरोप लगाए थे।
इन दोनों मामलों का खुलासा मधुबन थाना प्रभारी राजकुमार रंगा ने प्रेस वार्ता के दौरान किया। पुलिस ने इन दोनों मामलों में छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और सभी को कोर्ट में पेश कर जेल भी भेज दिया है। पुलिस ने चपरासी प्रवीन उसके दोस्त दीपक व विक्रम से एक लाख 80 हजार रुपए व वारदात में प्रयोग की गई बाइक भी बरामद कर ली है।
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ये थे दोनों मामले
पहला मामला
25 अक्तूबर को बसताड़ा निवासी प्रवीन ने मधुबन थाना पुलिस को शिकायत दी थी कि वह बसताड़ा गांव में एक निजी अस्पताल में चपरासी है। अस्पताल की अकाउंटेंट प्रियंका ने उसे फेडरल बैंक घरौंडा का एक लाख 80 हजार रुपये का चेक दिया था। उसने बैंक से एक लाख 80 हजार रुपये निकलवाए और स्कूटी की डिग्गी में रखकर अस्पताल आने लगा तो जीटी रोड पर बसताड़ा फ्लाईओवर के समीप पहुंचे ही बाइक पर सवार दो युवकों ने उसके सिर पर डंडा मारा तो वह स्कूटर से नीचे गिर गया। उन दोनों आरोपियों ने उसके स्कूटर की डिग्गी से 1.80 लाख रुपये निकाले और बाइक पर सवार होकर फरार हो गए।

दूसरा मामला
-26 अक्तूबर को घरौंडा निवासी व्यापारी अनुज जैन ने आरोप लगाए थे कि बसताड़ा चौक के समीप ऑटो सवार तीन युवकों ने उसकी गाड़ी के सामने कार को अड़ाकर रुकवाया और लोहे की रॉड से हमला कर उससे 2.90 हजार रुपये लूट लिए और सोने की चेन भी झपट कर ले गए, लेकिन बाद में अनुज जैन ने 2.90 हजार रुपये लूटने से मना कर दिया तो मधुबन थाना पुलिस ने मारपीट कर सोने की चेन झपटने का मामला दर्ज कर लिया था और जांच शुरू कर दी थी।

पुलिस ने दोनों मामलों का किया खुलासा
पहला मामला : डॉक्टर की मदद से हुआ 1.80 लाख रुपये की लूट का खुलासा
अस्पताल में कार्यरत चपरासी प्रवीन कुमार की शिकायत मिलने के बाद एसपी सुरेंद्र सिंह भौरिया ने इस मामले में गहनता से जांच करने के लिए मधुबन थाना प्रभारी राजकुमार रंगा को सख्त निर्देश दिए। थाना प्रभारी रंगा ने एएसआई प्रवीन के नेतृत्व में एक टीम का गठन कर इस मामले की जांच शुरू की। एएसआई प्रवीन ने शिकायतकर्ता व आरोपी प्रवीन का मेडिकल देखा और डॉक्टर से सलाह ली तो डॉक्टर ने उन्हें बताया कि ये चोट अपने बचाओ में मारी हुई लग रही हैं (सेल्फ इंजरी) इसके बाद एएसआई प्रवीन को शिकायतकर्ता पर ही शक हो गया। इसके बाद एएसआई ने पता किया की शिकायतकर्ता को किस टाइम 1.80 लाख रुपये का चेक दिया गया था और वह कब बैंक में गया और वहां से किसी टाइम लौटा। इसके बाद शिकायतकर्ता ने लूट होने की सूचना किसी टाइम पुलिस को दी। यह पूरी जानकारी लेने पर पता चला कि करीब बैंक से रुपये निकलवाने के बाद निजी अस्पताल में लौटने में करीब 15 से 20 मिनट लगनी थी, लेकिन लूट होने की वारदात कई घंटे बाद हुई। इसके बाद एएसआई प्रवीन ने शिकायतकर्ता प्रवीन से गहनता से पूछताछ कि तो उसने पूरे मामले का खुलासा कर बताया कि उसने यह रुपये हड़पने के लिए अपने दोस्त विक्रम व दीपक के साथ मिलकर यह झूठी लूट की वारदात का ड्रामा किया था।
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दूसरा मामला-कार को साइड ना देने पर हुआ था झगड़ा, व्यापारी ने झूठे लगा दिए लूट व स्नैचिंग के आरोप
व्यापारी अनुज जैन की शिकायत मिलते ही मधुबन थाना पुलिस एएसआई बलविंद्र ने इस मामले की गहनता से जांच की और ऑटो सवार तीनों आरोपी सुमित वासी मदीना जिला रोहतक, संजीव वासी कामी जिला सोनीपत और समुंद्र वासी बाजाना जिला सोनीपत को गिरफ्तार कर पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि कार को साइड ना देने पर उनका अनुज जैन से झगड़ा हुआ था। 2.90 हजार रुपये और सोने की चेन उन्होंने नहीं झपटी। इसके बाद पुलिस ने अनुज जैन से दोबारा पूछताछ की तो वह अपने बयानों से पलट गया और उसने बताया कि इस मामले को मजबूत करने व तीनों आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कराने के लिए उसने लूट व स्नैचिंग के झूठे आरोप लगाए थे।
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