अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। राइस मिलों में रखे चावल और धान की फिजिकल वेरिफिकेशन करने के नाम पर 20 लाख रुपये मांगने के मामले में मार्केटिंग बोर्ड ने आरोपी चारों अधिकारियों को अंडर इंक्वायरी ही बहाल कर दिया है। सबसे अहम बात ये है कि अभी तक पुलिस द्वारा गठित की गई एसआईटी द्वारा अभी तक आरोपियों को क्लीनचिट नहीं दी गई है और न ही विभागीय जांच पूरी हुई है। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि क्या ये अधिकारी अब जांच को प्रभावित नहीं करेंगे? इससे भी बड़ी बात ये है कि पुलिस बार-बार आरोपियों की गिरफ्तारी के दावे करती है, लेकिन सभी आरोपी अधिकारी लगातार बोर्ड के मुख्यालय में चक्कर लगा रहे हैं। उधर, विभागीय सूत्रों का दावा है कि इस मामले में राइस मिलर्स के साथ रजामंदी के प्रयास किये और मिलर्स द्वारा विरोध नहीं करने के बाद ही आरोपी अधिकारी बहाल किए गए हैं।
बता दें कि जनवरी माह में राइस मिलर्स राजेंद्र रहेजा ने एसडीएम और पुलिस को शिकायत दी थी कि मिलों की फिजिकल वेरिफिकेशन के नाम पर उनसे 20 लाख रुपये की मांग की जा रही है। मिलर्स से बाकायदा फोन पर रिकार्डिंग की सीडी भी सौंपी, इसमें करनाल मार्केट कमेटी के मंडी सुपरवाइजर अरविंद कुमार वेरिफिकेशन के नाम पर पैसे एकत्र करने की बात कर रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए मार्केटिंग बोर्ड के मुख्य प्रशासक मनदीप सिंह बराड़ खुद करनाल पहुंचे थे और राइस मिलर्स से पूरी जानकारी ली थी। इसके बाद मिलर्स की शिकायत पर सिटी थाना पुलिस ने करनाल मार्केट कमेटी की सचिव आशा रानी, मंडी सुपरवाइजर अरविंद सिंह, रायपुरानी मंडी के ऑक्शन रिकॉर्डर सतबीर सिंह, डीएमईओ (जिला मार्केटिंग प्रवर्तक अधिकारी) सौरभ चौधरी, एमडीओ सुनील शर्मा के खिलाफ खिलाफ केस दर्ज किया।
कुछ दिनों बाद ही इस मामले में एसपी ने एसआईटी बनाई, जिसमें सभी आरोपियों पर भ्रष्टाचार निरोधक एक्ट के तहत भी धारा जोड़ी गई थी। इस मामले में अभी तक केवल मोबाइल पर पैसे की डिमांड करने के आरोपी अरविंद कुमार की ही गिरफ्तारी हो सकी है, जबकि अन्य अधिकारियों की कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। हालांकि, एसआईटी द्वारा इनमें से दो अधिकारियों से पूछताछ भी की गई है। अब एसआईटी द्वारा तीन आरोपियों को केस से निकालने की लगभग तैयारी कर ली है। इनमें डीएमओ सुनील शर्मा, सचिव आशा रानी, सतबीर सिंह के नाम शामिल हैं, जबकि अरविंद और सौरभ चौधरी को मुख्य आरोपी बनाने की तैयारी में है। बता दें कि एक माह पहले ही अमर उजाला ने इस बात के संकेत दिए थे। अब मार्केटिंग बोर्ड के मुख्य प्रशासक की ओर से चारों आरोपियों को अंडर इंक्वायरी बहाल कर दिया गया है।
सौरभ चौधरी की गिरफ्तारी को जारी हैं प्रयास : डीएसपी
इस बारे में एसआईटी के इंचार्ज रमेश चंद ने बताया कि पूरा केस स्टडी कर लिया है। इस मामले में सीधे तौर पर अरविंद कुमार और डीएमईओ सौरभ चौधरी शामिल हैं। इसके पुख्ता सबूत भी एकत्र कर लिए गए हैं। अन्य अधिकारियों के इस खेल में शामिल होने को लेकर कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं। दो अधिकारियों को पूछताछ के लिए जांच में शामिल किया है और उनके बयान भी लिए गए हैं। आरोपी अधिकारियों को बहाल करने या नहीं करने का कार्य मार्केटिंग बोर्ड का है, हमने अभी तक किसी भी अधिकारी को क्लीनचिट नहीं दी है। जांच जारी है और आरोपी सौरभ सिंह की गिरफ्तारी को लेकर प्रयास जारी हैं।
हमारा किसी से समझौता नहीं हुआ : रहेजा
हमारे से फिजिकल वेरिफिकेशन के नाम पर पैसे मांगे गए थे, इसलिए हमने तुरंत मामला प्रशासन और पुलिस की जानकारी में लाया था। पांच अधिकारियों पर केस दर्ज हुआ था, जांच में जो सामने आएगा, उसके अनुसार ही कार्रवाई की गई होगी। हमारा किसी से कोई समझौता नहीं हुआ है। हम भी यही चाहते हैं कि जिसका कसूर हो, वो बचना नहीं चाहिए और जिसका कसूर नहीं हो, उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
-राजेंद्र रहेजा, शिकायतकर्ता, मिलर्स।