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पिकाड़ली डिस्टलरी सील, किसानों के जाम और प्रदर्शन के कारण बंद नहीं कर सके शुगर मिल

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अमर उजाला ब्यूरो
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इंद्री (करनाल)। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भादसो स्थित पिकाडली डिस्टलरी के पंप और उसकी लाइन को सील कर दिया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम शुगर मिल को सील करने गई थी, लेकिन वहां किसानों के जाम और प्रदर्शन के कारण शुगर मिल को सील नहीं किया जा सका। किसानों ने सील करने के विरोध में जाम लगा दिया और कहा कि पहले हमारे गन्ने की पिराई का इंतजाम करा दें।
उसी के बाद मिल को सील करने देंगे। किसानों के विरोध और रास्ता जाम किए जाने के कारण मिल को सील करने का निर्णय तीन दिन के लिए टाल दिया गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एसडीओ शैलेंद्र अरोरा का कहना है कि प्रदूषण फैलाने के आरोप में एनजीटी ने इस सुगर मिल और डिस्टलरी को सील करने के आदेश किए थे। उसी आदेश पर टीम डिस्टलरी और चीनी मिल को सील करने गई थी। वहां किसानों ने कहा कि उनके गन्ने की पिराई के बाद ही मिल सील की जाए, क्योंकि अभी तो उनका गन्ना खेतों में खड़ा है। किसानों ने गन्ने की पर्चियां भी दिखाईं। उसी समय मिल के बाहर काफी किसान एकजुट हो गए और जाम लगा दिया। ऐसे में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों ने मिल को सील करने के स्थान पर डिस्टलरी प्लांट में शराब के लिए जा रहे शीरा (कच्चे मेटेरियल) के पंप और उसकी लाइन को सील कर दिया। जिससे कि शराब न बन सकें। सुगर मिल को सील करने के बारे में बड़े अफसरों से बात करके शुक्रवार को निर्णय लिया जाएगा।
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उधर, ग्राम सेवा समिति के प्रधान आत्मप्रकाश ने बताया कि उन्होंने शुगर मिल व शराब फैक्टरी के कारण फैल रहे प्रदूषण के खिलाफ एनजीटी का दरवाजा खटखटाया था। एनजीटी ने इस पर संज्ञान लिया है। उसी के बाद यह कार्रवाई हुई है।


फैक्टरी को बंद करवाकर ही लेंगे दम ग्राम सेवा समिति के प्रधान आत्मप्रकाश का कहना है कि शुगर मिल और फैक्टरी से बड़े स्तर पर फैल रहे प्रदूषण को बंद करवाने के लिए हम काफी लंबे समय से लड़ाई लड़ रहे हैं। एनजीटी में भी इसके खिलाफ केस दायर किया हुआ है। जब तक शराब फैक्टरी बंद नहीं होगी हम चैन से नहीं बैठेंगे।
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हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन के आदेश पर यह कार्रवाई की गई है। यह मामला एनजीटी में भी विचाराधीन है। कंपोस्ट प्लांट में कई खामियां मिली हैं। टैंक और नालियां भी कच्ची हैं। मिल को बंद करने के बारे में अब शुक्रवार को फैसला लिया जाएगा। -शैलेंद्र अरोरा, एसडीओ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
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