ब्रास बैंड के साथ मोबाइल डीजे की मांग भी बढ़ी
भगवान दास
करनाल। दूल्हे की शादी हो या शगुन, मेहंदी हो या फिर हल्दी की रस्म, इस अवसर पर अगर पंजाबी ढोल न हो तो रौनक कम हो जाती है। जैसे ही पंजाबी ढोल और ताशे की तड़ तड़ गूंजती है तो नाचने वालों के पैर अपने आप थिरकने लग जाते हैं।
आनंद ढोल और ताशा पार्टी के संचालक आनंद बताते हैं कि आजकल की शादी में युवा वर्ग सात लोगों के ग्रुप में ढोल और ताशा पार्टी की ज्यादा डिमांड कर रहे हैं, जबकि पहले केवल तीन लोगों से काम चल जाता था लेकिन वक्त बदला और स्टेज पर होने वाला बोलियों वाला कार्यक्रम भी डीजे इन व्हील या फिर कहें माइक और स्पीकर वाले बॉक्स से बोलियां बोली जा रही हैं जो लोगों को ढोल के साथ काफी पसंद आ रही हैं। शादी के सात लोगों के ग्रुप और सुंदर ड्रेस के साथ 15 हजार रुपए से बुकिंग शुरू होती है जो 51 हजार रुपए तक होती है।
रवि ब्रास बैंड के संचालक रवि कुमार सौदा ने बताया कि समय के साथ सब बदल गया है। कोरोना महामारी के बीच बैंड और बग्गी वाले को खाने के लाले पड़ गए थे लेकिन अब बैंड और बग्गी की खूब मांग हो रही है। मध्यम परिवार के लोग जहां 11 लोगों की बैंड पार्टी से काम चला लेते हैं, वहीं उच्च परिवार के लोग पंजाबी ढोल पार्टी, मोबाइल डीजे, विक्टोरिया बग्गी और बाहुबली एलईडी वाली बग्गी के साथ सुंदर ड्रेस वाले 21 से 31 कलाकारों वाले बैंड की मांग करते हैं। - संवाद
पंडाल के अंदर शहनाई
पहले जहां बरात के साथ स्वागत में शहनाई बजाई जाती थी लेकिन अब शहनाई की जगह स्वागत से बदल कर पंडाल के अंदर पहुंच गई है वो भी केवल शौकिया लोगों तक। शहनाई वादक राजकुमार का कहना है कि शादी के सीजन में अब एक-दो लोग ही हमें भी याद कर लेते हैं, नहीं तो शहनाई की जगह डीजे वैन ने ले ली है।
फिर बढ़ रही सपेरा बीन, बैगपाइपर बैंड की मांग
सूचना विभाग से सेवानिवृत कर्मचारी रामकुमार बताते हैं कि कभी हरियाणा की शादियों की शान रहने वाले सपेरा बीन बैंड और बैगपाइपर बैंड प्राय: लुप्त हो चुके हैं लेकिन भला हो भाजपा सरकार का, जिसे ये बाद्य यंत्र याद आए और गीता जयंती, सूरज कुंड मेले, फल्गू मेले, कपालमोवन मेले और धार्मिक कार्यक्रमों में इनकी मांग बढ़ने लगी है वही देख कर लोग अब इन्हें शादी और अन्य पारिवारिक कार्यक्रमों में बुलाने लगे हैं।