- पहले जारी होगा नोटिस, तय समय में भुगतान न करने पर संपत्ति होगी सील
- संपत्ति कर बिलों के भुगतान पर 15 प्रतिशत छूट की अवधि 31 तक बढ़ाई
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। नगर निगम अब एक से पांच लाख तक के संपत्तिकर के बकायेदारों पर शिकंजा कसेगी। जिसके लिए ऐसे 236 बकायेदारों की सूची तैयार कर ली गई है, जिन्हें नोटिस देने के निर्देश दिए गए हैं। तय अवधि में बकाया भुगतान नहीं करने पर उनकी संपत्ति को सील किया जाएगा।
नगर निगम आयुक्त अभिषेक मीणा ने बताया कि हरियाणा सरकार ने प्रॉपर्टी आईडी को स्वप्रमाणित करने के बाद चालू वित्त वर्ष के बिलों पर 15 नवंबर तक दी गई 15 प्रतिशत छूट की अवधि को बढ़ाकर अब 31 दिसंबर तक कर दिया है। संपत्तिकर दाता अब 31 दिसंबर 2023 तक, 2010-11 से 2022-23 तक के संपत्ति कर से जुड़े सभी बकाया राशि की एकमुश्त अदायगी करने पर समस्त ब्याज माफी का लाभ ले सकते हैं। ऐसा करने वाले नागरिक को संपत्ति कर की बकाया मूल राशि यानी एरियर पर भी 15 प्रतिशत छूट का लाभ मिलेगा, लेकिन इसके लिए उसे अपनी प्रॉपर्टी आईडी को स्व-प्रमाणित करना होगा।
इसके अतिरिक्त सरकार की ओर से सभी कर दाताओं को 31 दिसंबर तक अपनी प्रॉपर्टी आईडी. को स्व-प्रमाणित करने पर, चालू वित्त वर्ष के बिलों पर भी 15 प्रतिशत की छूट का लाभ दिया जाएगा, लेकिन यदि देर से भुगतान किया तो प्रति माह डेढ़ प्रतिशत की दर से ब्याज भी लगाया जाएगा। उन्होंने बताया कि नगर निगम के खजाने में आठ करोड़ रुपये से अधिक प्रॉपर्टी टैक्स जमा हो चुका है। संपत्ति कर को एनडीसी पोर्टल पर ऑनलाइन जमा करवाने की भी सुविधा है। ऐसा करने पर संबंधित व्यक्ति को चालू वित्त वर्ष के बिल पर एक प्रतिशत की अतिरिक्त छूट का लाभ भी मिलेगा।
निगमायुक्त ने नगर निगम के सभी संपत्ति कर दाताओं व बकायादारों से अपील की कि वह सरकार की इस घोषणा का लाभ उठाएं और जो भी संपत्ति कर देय बनता है, उसे नगर निगम के खजाने में जमा करवाएं। संपत्ति कर और निगम के अन्य आय स्रोतों से जो भी धनराशि एकत्र होती है, वह शहर के विकास कार्यों पर ही खर्च की जाती है।
ऐसे करें प्रॉपर्टी आईडी को स्व-प्रमाणित
निगम आयुक्त ने बताया कि नागरिक, एनडीसी पोर्टल ulbhryndc.org पर अपनी संपत्ति आईडी डालकर उसे स्व प्रमाणित कर सकते हैं। जैसे ही इसमें डिटेल आएगी, उसे ध्यान से पढ़ने के बाद जो ठीक दिखाई दे, उसे यस करें। सभी बिंदुओं को यस करने के पश्चात सबमिट करने पर प्रॉपर्टी आईडी स्व-प्रमाणित हो जाएगी। यदि आईडी में कोई त्रुटि हो तो उसे नो करके साथ-साथ आपत्ति दर्ज कर दें। डाली गई आपत्ति का समाधान हो जाएगा। इसका एक फायदा यह भी है कि स्व-प्रमाणित करने के पश्चात अपनी प्रॉपर्टी आईडी को संबंधित नागरिक ही देख सकता है, अन्य कोई व्यक्ति उसे नहीं देख पाएगा।