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Video: युवक के लिए फरिश्ता बनी नर्सिंग ऑफिसर अंकिता, भीड़ ने जिसे मरा समझा, कुछ देर बाद चलने लगी उसकी सांसें

Thu, 22 May 2025 07:29 PM IST
शाहिल शर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल

सार

करनाल में एक नर्सिंग ऑफिसर युवक के लिए फरिश्ता बनकर आई और उसकी जान बचा दी। मौके पर मौजूद लोग युवक को मृत समझ चुके थे जिसके बाद वहां पर अंकिता आई जो अस्पताल में नर्स सुपरवाइजर का काम करती हैं। उन्होंने सीपीआर देकर युवक की जान बचा दी। इसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। 
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नर्सिंग ऑफिसर ने बचाई युवक की जान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सेक्टर-6 करनाल में बीते मंगलवार रात को एक महिला नर्सिंग सुपरवाइजर ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए एक युवक की जान बचाई। बेसुध पड़े युवक को जहां भीड़ मृत मान चुकी थी। वहीं, विर्क अस्पताल की नर्सिंग सुपरवाइजर अंकिता मान ने उसकी नब्ज जांची और फिर बिना समय गंवाए सीपीआर देकर उसकी सांसें लौटा दीं। यह पूरी घटना कैमरे में कैद हो गई जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। 
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नब्ज चेक कर दी सीपीआर

अंकिता मान सेक्टर-6 की निवासी हैं और विर्क अस्पताल में नर्सिंग सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत हैं। मंगलवार रात करीब 10 बजे जब वे अपने बेटे को आइसक्रीम दिलाने के लिए घर से निकलीं, तो गुरुद्वारे के पास सड़क किनारे भीड़ देखकर रुकीं। वहां एक युवक अचेत अवस्था में पड़ा था, जिसे देखकर लोगों ने उसे मृत समझ लिया था। मेडिकल फील्ड से जुड़ी अंकिता ने स्थिति को गंभीरता से लिया और युवक की नब्ज चेक की। जब उन्होंने महसूस किया कि युवक की नब्ज चल रही है, तो उन्होंने तुरंत सीपीआर देना शुरू किया। कुछ ही देर में युवक की सांसें लौट आईं और वह हल-चल करने लगा। इसके बाद अंकिता ने विर्क अस्पताल की एंबुलेंस मंगवाई और युवक को अस्पताल पहुंचाया।
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खाने की नली में फंसा था खाना


अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद युवक को कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। डॉक्टरों के मुताबिक युवक की सांस की नली में खाना फंस जाने से वह बेहोश हो गया था और समय पर सीपीआर न मिलने की स्थिति में उसकी जान भी जा सकती थी। विर्क अस्पताल के डॉक्टरों और शहरवासियों ने अंकिता की इस मानवीय पहल की प्रशंसा की है। अंकिता ने बताया कि ड्यूटी पर रहते हुए उन्होंने कई लोगों की जान बचाई है लेकिन यह पहला मौका था जब ऑफ ड्यूटी होने के बावजूद उन्होंने किसी की जान बचाई। उन्होंने कहा कि अगर उस वक्त पल्स चेक नहीं करती तो युवक की मौत तय थी।

डॉक्टर ने कहा कि सीपीआर एक ऐसी जीवन रक्षक प्रक्रिया है, जो हर व्यक्ति को आनी चाहिए। समय रहते सीपीआर देने से मस्तिष्क और हृदय को ऑक्सीजन मिलती है, जिससे कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।

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