- बिजली निगम ने चोरी के डर से ट्रांसफार्मर की धातु में किया बदलाव, पहले किसानों को तो अब निगम पर लगता है हर्जाना
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिलेभर में बढ़ रही खेतों के ट्रांसफार्मर की चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए बिजली निगम की ओर से अब तांबे का ट्रांसफार्मर चोरी होने पर एल्युमीनियम का नया ट्रांसफार्मर दिया जाएगा। बिजली निगम की ओर ट्रांसफार्मर की ज्यादा चोरी की घटनाओं के डर से ट्रांसफार्मर की धातु में बदलाव किया गया है।
खेत का ट्रांसफार्मर चोरी होने पर पहले किसान की ओर से गारंटी व बिना गारंटी वाले ट्रांसफार्मर का अलग-अलग हर्जाना भरा जाता था। इसमें से कुछ राशि निगम तो आधे से ज्यादा राशि किसान को ही अदा करनी पड़ती थी। अब नियम में बदलाव करके ट्रांसफार्मर का सामान चोरी होने पर उसका सारा खर्चा निगम की ओर से ही वहन किया जाता है। ट्रांसफार्मर का सामान चोरी होने की ज्यादातर घटनाएं कुंजपुरा, इंद्री और घरौंडा क्षेत्र में है। यमुना के नजदीक इन क्षेत्रों का रकबा सबसे ज्यादा है इसलिए ट्रांसफार्मर का सामान चोरी करके चोर उत्तर प्रदेश की ओर निकल जाते है। ट्रांसफार्मर चोरी होने से निगम को निगम को छह माह में करीब 3.70 करोड़ रुपये की चपत लगी है। दूसरी ओर कागजी कार्रवाई में उलझे किसानों को ट्रांसफार्मर मिलने में 10
से 15 दिन लग जाते हैं। ट्रांसफार्मर के इंतजार में किसानों की फसल सूख जाती है। इससे किसानों को दोहरा नुकसान होता है। उत्तर हरियाणा बिजली निगम की ओर से जुलाई 2024 से खेतों में 16 केवीए के एल्यूमीनियम के ट्रांसफार्मर लगाने शुरू कर दिए गए थे। उसके बाद जिले में जो भी ट्रांसफार्मर चोरी हुआ उसके बदले में किसानों को एल्मूनियम का ही ट्रांसफार्मर मिला है।
वहीं कंई मामलों में देखा गया है कि चोर ट्रांसफार्मर के अंदर का तेल निकालकर ले जाते हैं और एल्यूमीनियम की क्वाइल को तोड़फोड़ कर बिखेर देते हैं।
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तांबा ट्रांसफार्मर की होती है ज्यादा चोरी
खेतों में बिजली के फाल्ट को रोकने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से करीब पांच साल पहले एचवीडीएस (हाई वोल्टेज डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम) योजना के तहत सभी किसानों को उनके
ट्यूबवेल की क्षमता के हिसाब से तांबा धातु से बने 16 केवी के छोटे ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराए गए थे। मार्केट में तांबा का रेट काफी ज्यादा है इसलिए चोर रात को खेतों में ट्रांसफार्मरों को अपना निशाना बनाने लगे। अब जहां ट्रांसफार्मर का सामान चोरी होता है तो वहां पर एल्यूमीनियम का ट्रांसफार्मर लगाया जाता है ताकि चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके। ट्रांसफार्मर रिपेयर करने वाले संगोहा गांव के मिस्त्री ने बताया कि तांबे के ट्रांसफार्मर की कीमत करीब एक लाख होती थी लेकिन एल्मूनियम के ट्रांसफार्मर उसी क्षमता के 50 से 55 हजार में मिल जाते है। वहीं एल्मूनियम के अंदर से ऐसा सामान भी नहीं निकलता जिसे मार्केट में बेचा जा सके। तांबा ट्रांसफार्मर की सामग्री आसानी से बाजार में बिक जाती थी।
वर्ष 2021 से अभी तक ट्रांसफार्मर हुए चोरी
वर्ष ट्रांसफार्मर चोरी
2021-22 841
2022-23 968
2023-24 1039
2024-25 1090
अप्रैल 2025 100
मई 2025 156
जून 2025
124
खेतों के ट्रांसफार्मर की चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए बिजली निगम की ओर से अब तांबे का ट्रांसफार्मर चोरी होने पर एल्युमीनियम का नया ट्रांसफार्मर दिया जाता है। अप्रैल, मई, जून में ट्रांसफार्मर चोरी की घटनाएं ज्यादा होती हैं। निगम की कोशिश रहती है कि किसानों को जल्द ट्रांसफार्मर मिल जाए। ट्रांसफार्मर चोरी होने से अब निगम को भारी नुकसान होता है।
-नसीब सिंह, अधीक्षक अभियंता, उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम, करनाल