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प्रोबायोटिक के सेवन से बढ़ेगी प्रतिरोधक क्षमता, आंतें रहेंगी स्वस्थ

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राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान करनाल में छह वर्ष तक किए गए शोध में पाया गया है कि प्रोबायोटिक (लाभकारी जीवाणु) मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। इससे न सिर्फ आंतें स्वस्थ रहती हैं, बल्कि एलर्जी से भी बचाव होता है। संस्थान के निदेशक डा. मनमोहन सिंह चौहान ने बताया कि पशु जीव रसायन विभाग में छह वर्ष तक चले शोध के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
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शोध टीम के प्रधान वैज्ञानिक डा. राजीव कपिला ने बताया कि प्रोबायोटिक मानव शरीर में पैथोजंस (हानिकारक बैक्टीरिया) को आंतों में चिपकने नहीं देते। इन दोनों में प्रतिस्पर्धा बनी रहती है। आपसी लड़ाई के बावजूद शरीर में प्रोबायोटिक बचे रहते हैं। हालांकि चिकित्सक कैप्सूल के रूप में मरीजों को प्रोबायोटिक देते हैं लेकिन यदि दूध व दुग्ध उत्पादों के साथ प्रोबायोटिक ले लिया जाए तो अधिक बेहतर होगा। उन्होंने बताया कि जिस तरह दही बनाने के लिए दूध में जामन लगाते हैं, उसी तरह दूध में प्रोबायोटिक का उचित मात्रा में मिश्रण कर दिया जाएगा। जामन में भी लैक्टोबेसिलस नामक प्रोबायोटिक होता है। यही वजह है कि कई बीमारियों में चिकित्सक दही के सेवन की सलाह देते हैं।
कृत्रिम कोशिकाओं व चूहों पर आजमाया
शोध के दौरान मानव पेट की कोशिकाओं का कल्चर करके उन पर प्रोबायोटिक का प्रभाव देखा गया है। कृत्रिम मानव आंत की कोशिकाओं को प्रयोगशाला में कल्चर करके पैथोजन व प्रोबायोटिक के बीच स्पर्धा करवाई। तब यह निष्कर्ष निकाला गया। इसके बाद चूहों पर यह शोध आजमाया गया। उनकी संक्रमित आंतों के कारण जब प्रोबायोटिक दिया गया तो उसका लाभ दिखा है।
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मस्तिष्क को प्रफुल्लित करती हैं स्वस्थ आंतें
डा. कपिला ने बताया कि प्रोबायोटिक असंख्य रूप से मानव शरीर में विद्यमान होते हैं, जो आंतों को रोगों से बचाते हैं। स्वस्थ अंतड़ियां दिमाग में स्वस्थ संदेश उत्पन्न करने की क्षमता रखती हैं। मन-मस्तिष्क में अच्छे विचार आते हैं। विज्ञान ने यह साबित कर दिया है कि यदि अंतड़ियां सही हैं तो दिमाग, शरीर व सेहत सही तरीके से कार्य करेंगे। सेहतमंद रहने के लिए पेट को सही रखना जरूरी है।
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