हम 21वीं सदी में जी रहे हैं। लड़कियों को लेकर आज भी हमारी सोच पुरातनपंथी है। कम से कम पीरियड को लेकर तो यहीं रवैया है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर पीरियड अवेयरनेस को लेकर अमर उजाला ने पड़ताल की। इसमें फीमेल सिटीजन जर्नलिस्ट की मदद से लड़कियों से उनके पहले पीरियड व इसके बारे में पता होने के बारे में जानकारी जुटाई गई।
सर्वे में अलग-अलग कालेज जाने वाली 200 लड़कियों को शामिल किया गया। बातचीत में यह सामने आया कि 40 प्रतिशत लड़कियों को पहली बार पीरियड होने से पहले इसके बारे में पता भी नहीं था। जब उनके परिवार में इसकी जानकारी मिली तो उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया कि अचानक सब कुछ बदल गया हो..।
उन्हें रसोई और पूजा घर में जाने पर रोक लगा दी। यहां तक की पूरे घर में वह आ जा नहीं सकती है। लड़कियों ने जो अनुभव शेयर किए, उससे यहीं पता चलता है कि इस सामान्य परिवर्तन को आज भी डेब्यू की तरह माना जाता है।
10 प्रतिशत लड़कियां अपनी मां से भी डर गईं
सर्वे में शामिल लड़कियों में से 70 प्रतिशत लड़कियों ने बताया कि उन्होंने अपने पहले पीरियड की बात और इसके बारे में अपनी मां से शेयर किया। जबकि 10 प्रतिशत लड़कियों ने बताया कि उन्होंने पीरियड होने पर फैमिली फीमेल डाक्टर से इसके बारे में सबसे पहले बात की थी। क्योंकि वे डर गई थी कि यह क्या हो गया? कहीं मम्मी से इसके बारे में बात करें तो वे डांटेगी। जबकि 20 प्रतिशत लड़कियां ऐसी मिली जिन्होंने इसके बारे में सबसे पहले अपनी फ्रैंड से बातकर इसके बारे में जानकारी ली।
25 प्रतिशत लड़कियां मां और 20 प्रतिशत स्कूल से हुई थी जागरूक
क्या पीरियड होने से पहले इसके बारे में जानकारी थी कि पीरियड क्या होता है? इस सवाल पर 40 प्रतिशत लड़कियों ने न में जवाब दिया। जबकि 25 प्रतिशत ने कहा कि उनकी मां ने इस बारे में पहले बताया था। 20 प्रतिशत ने स्कूल में होने वाले वूमैन सेल के कार्यक्रम और टीचर से इसके बारे में जानकारी मिलने की बात कही। जबकि 15 प्रतिशत लड़कियों ने कहा कि उनके ग्रुप में कुछ सीनियर लड़कियां भी थी, जिनसे उन्हें इसके बारे में जानकारी मिली।
लड़की को अलग रखने के बजाय इंफेक्शन से बचाने की जरूरत
गायिनी डॉ. प्रभजोत का कहना है कि पीरियड एक नार्मल प्रोसेस है। यह नेचुरल है, इसलिए इसे मासिक धर्म भी कहा जाता है। पीरियड के दौरान लड़कियों को अलग रखने की जरूरत नहीं है। ऐसा बर्ताव नहीं करना चाहिए। लड़की को इंफेक्शन से बचाने की ओर ध्यान देना चाहिए। हम अगर इसमें सफाई नहीं रखते तो बैक्टीरिया से काफी दिक्कतें आती हैं। सेनेटरी पैड का इस्तेमाल ही इंफेक्शन से बचने का सही रास्ता है। कपड़ा इस्तेमाल करते हुए सावधानियां बरतने की जरूरत है।
बेटियों को जागरूक करना जरूरी, ताकि पहले से तैयार रहें
गवर्नमेंट कालेज की प्रिंसिपल एवं मनोवैज्ञानिक डॉ. रेखा शर्मा का कहना है कि पहली बार पीरियड होना लड़की के साथ एक चमत्कार की तरह है। क्योंकि लड़की को पता नहीं होता कि उसके साथ एकदम से ऐसा होने वाला है। इसके लिए पहले पता होना जरूरी है। ताकि वह तैयार रहें। अभिभावकों को भी इसके बारे में बेटियों को अवेयर करना चाहिए। अचानक खून देखकर लड़कियां घबरा भी जाती हैं। 10-12 साल की लड़की को यह पता नहीं होता।