इसी क्षेत्र से भाजपा नेता डाॅ. पवन सैनी वर्ष 2014 में पहली बार मोदी लहर में विधायक बने थे। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी इनेलो प्रत्याशी बच्चन काैर बड़शामी को शिकस्त दी थी मगर 2019 में डाॅ. पवन सैनी कांग्रेस प्रत्याशी मेवा सिंह से हार गए। हालांकि इस चुनाव में भाजपा का वोट प्रतिशत 1.80 फीसदी जरूर बढ़ा लेकिन डाॅ. पवन सैनी को हार का मुंह देखना पड़ा।
इस बार भी डाॅ. पवन सैनी ही भाजपा से टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे मगर सीएम के लिए सेफ सीट ढूंढ़ रही भाजपा को सैनी बहुल माने जाने वाली लाडवा सीट ज्यादा उपयुक्त दिखी। पार्टी सूत्र बताते हैं कि भाजपा ने भी जातिगत समीकरणों की समीक्षा करते हुए सीएम नायब सिंह सैनी को पंजाबी बहुल सीट करनाल से बदलकर लाडवा से उतारने का फैसला लिया है। इसके चलते डाॅ. पवन सैनी की टिकट कट गई। फिलहाल यहां भाजपा में कोई विरोध नहीं है, इसका फायदा सीएम को मिल सकता है।
दूसरी ओर इसी सीट से विधायक रहे मेवा सिंह अपनी टिकट को लेकर पहले ही आश्वस्त थे। इसलिए उन्होंने अपनी टीम के साथ चुनावी तैयारी भी शुरू कर रखी थी। अब टिकट की औपचारिक घोषणा के बाद उनकी टीम पूरी तरह से मैदान में सक्रिय दिख रही है। मेवा सिंह भी इनेलो और भाजपा दोनों दलों में रह चुके हैं। सरपंच पद से अपना राजनीतिक कॅरिअर शुरू करने वाले मेवा इनेलो के समर्थन से कुरुक्षेत्र जिला परिषद के अध्यक्ष थे। वर्ष 2009 में उन्होंने भाजपा की टिकट से चुनाव लड़ा था मगर वे तीसरे स्थान पर रहे। वर्ष 2011 में मेवा सिंह भाजपा को अलविदा कह कांग्रेस में चले गए। वर्ष 2019 में कांग्रेस ने उन्हें टिकट देकर मैदान में उतारा और वे जीतकर विधायक बने। अबकी बार मुकाबला कड़ा है, क्योंकि मेवा के सामने अब सीएम नायब सैनी हैं।
कुरुक्षेत्र जिले की लाडवा सीट सैनी बहुल सीट मानी जाती है मगर इस सीट पर जाट और ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या अच्छी खासी है। करीब 1 लाख 95 हजार 816 मतदाताओं में से लगभग 20 फीसदी से अधिक वोटर सैनी बिरादरी से हैं। इसी तरह 18 फीसदी से अधिक यहां जाट और 11 प्रतिशत से अधिक ब्राह्मण मतदाता हैं। राजनीतिक मामलों के जानकार डाॅ. आरआर मलिक बताते हैं कि लाडवा सीट पर जीत के लिए यहां तीन प्रमुख जातियों काे साधना बहुत जरूरी है।
इस सीट पर जहां सैनी बिरादरी का भी प्रतिनिधित्व रहा, वहीं जाट बिरादरी के नेताओं को इस क्षेत्र की कमान संभालने का माैका मिला है। अबकी बार भी तीन प्रत्याशियों में से एक सैनी और दो जाट बिरादरी से ताल्लुक रखते हैं। ब्राह्मण और एससी बिरादरी के मतदाता भी यहां अपना अहम योगदान रखते हैं। इसलिए इन जातियों को साधकर ही इस सीट से जीत की राह निकलेगी।