फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Karnal News: सफाई, रंगाई-पुताई से बढ़ी अस्थमा रोगियों की समस्या

Mon, 13 Oct 2025 01:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

करनाल। दिवाली पर घरों में सफाई और रंगाई-पुताई सांस रोगियों के लिए समस्या बन गई है। घरों और बाजारों में उड़ती धूल व धुएं से उनको सांस लेने में परेशानी हो रही है। जिला नागरिक अस्पताल की सांस रोग ओपीडी में विगत सप्ताह में प्रतिदिन 120 तक अस्थमा के मरीज पहुंच रहे हैं। सामान्य दिनों के मुकाबले यह संख्या करीब 20 फीसदी ज्यादा है।

नागरिक अस्पताल से श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप ने बताया कि पिछले एक सप्ताह में अस्थमा और एलर्जी के मरीजों की संख्या बढ़ी है। पिछले सालों के आंकड़ों पर गौर करें तो दिवाली खत्म होने तक ओपीडी 250 मरीजों तक हो जाती है। ओपीडी में अस्थमा के मरीज तो आ ही रहे हैं, सामान्य लोग भी सांस लेने में समस्या की शिकायत कर रहे हैं। इनमें बच्चों की संख्या अधिक है। इसका कारण सफाई के दौरान धूल और धुएं के संपर्क में आने से सूक्ष्म कणों का सांस नली में पहुंचकर सूजन और संक्रमण फैलाना है। अस्थमा के मरीजों को दवा नियमित लेने की सलाह दी जा रही है। जरूरत पर डोज भी बढ़ाई जा रही है। अन्य मरीजों को भी जरूरत पर दवा दी जा रही है।
विज्ञापन

डॉ. प्रदीप ने बताया कि बच्चों और बुजुर्गों में सूक्ष्म कण सांस से संबंधित संक्रमण (जैसे ब्रॉन्काइटिस, निमोनिया) का जोखिम बढ़ाते हैं। जो लोग लंबे समय से सिगरेट पीते रहे हैं या सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्पनरी डिजीज) वाले हैं, वे फेफड़ों की कार्यक्षमता तेजी से खो सकते है। सांस लेने में दिक्कत हो सकती है।
- लगातार संपर्क से बढ़ जाती है दिक्कत
डॉ. प्रदीप ने बताया कि धूल और धुएं का असर लंबे समय में फेफड़ों की क्षमता को कम करता है। लगातार धूल-धुएं के संपर्क में रहने से अस्थमा के दौरे बार-बार आने लगते हैं। अस्थमा और सीओपीडी के मरीज, बच्चे और 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोग, दिल की पुरानी बीमारी वाले मरीज और हाल ही में सर्जरी करवा चुके या कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है।


पीएम 2.5 और पीएम 10 कण सिकोड़ देते हैं सांस की नली
रंगाई-पुताई, सफाई और पटाखों से निकलने वाले सूक्ष्म धूल और धुएं के कण फेफड़ों तक सीधे पहुंचते हैं। विशेषकर पीएम 2.5 और पीएम 10 कण नाक-गले में चिपककर नाक बंद होने, गले में खराश और खांसी की समस्या पैदा करते हैं। सांस नली को सिकोड़ देते हैं। अस्थमा के मरीजों में इससे समस्या होती है।
विज्ञापन




चिकित्सक की सलाह

घर में सफाई या रंगाई के दौरान अच्छी गुणवत्ता वाला मास्क पहनें। रंगाई-पुताई वाले कमरे में रात को न सोएं। अस्थमा मरीज डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित दवा और इन्हेलर का इस्तेमाल जारी रखें। धूल से बचने के लिए बच्चों और बुजुर्गों को प्रदूषित माहौल से दूर रखें। सुबह-शाम भाप लेने और गुनगुना पानी पीने जैसे घरेलू उपाय मददगार साबित हो सकते हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें