संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। इस बार विद्यालयों में 21 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर पारंपरिक औपचारिक कार्यक्रमों के बजाय पूरी तरह गतिविधि आधारित रूप में मनाया जाएगा। बच्चों को अपनी मातृभाषा में बोलने, सुनने, समझने और अभिव्यक्ति के अवसर देने के लिए कक्षाओं में कहानी-कथन, चित्र-वर्णन, लोकगीत गायन और दैनिक जीवन से जुड़े भूमिका-अभिनय जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
कार्यक्रम के लिए एफएलएन समन्वयकों ने मेंटर्स के साथ योजना बैठक की है। बैठक में मेंटर्स को अपने-अपने क्लस्टर के शिक्षकों को गतिविधियों की रूपरेखा समझाने के निर्देश दिए हैं, ताकि जिले में 483 राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में बालवाटिका से कक्षा पांचवीं तक आयोजन एकरूपता के साथ हो सके। वहीं, इस बार विद्यालय प्रमुखों को निर्देश दिए गए हैं कि स्कूल प्रबंधन समितियों के माध्यम से अभिभावकों, दादा-दादी और समुदाय के सदस्यों को कार्यक्रम में शामिल किया जाए। कई गतिविधियों में अभिभावक स्वयं बच्चों को प्रोत्साहित करेंगे या लोक-कथाएं सुनाएंगे, जिससे घर जैसा भाषा वातावरण तैयार हो सके।
प्रार्थना सभा से होगी शुरुआत
विद्यालयों में दिन की शुरुआत प्रार्थना सभा से होगी, जिसमें मातृभाषा के महत्व, भाषा विविधता और सांस्कृतिक विरासत पर विद्यार्थियों से संवाद किया जाएगा। बच्चों को अपनी भाषा पर गर्व करने और दैनिक जीवन में उसका अधिक उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
छोटे बच्चों को बोलने का मिलेगा मंच
बालवाटिका से कक्षा दो तक के विद्यार्थियों के लिए विशेष गतिविधियां तय की गई हैं। मेरी मातृभाषा मेरी पहचान गतिविधि में बच्चे घर में बोली जाने वाली भाषा का परिचय देंगे और छोटे-छोटे वाक्य बोलेंगे। चित्र देखो-बताओ गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थी चित्रों का वर्णन अपनी मातृभाषा में करेंगे। लोकगीत और बालगीत समूह में गाकर उच्चारण और लय का अभ्यास कराया जाएगा। शिक्षक या अभिभावक लोककथा सुनाएंगे, जिसे बच्चे दोहराएंगे या अपने शब्दों में सुनाने का प्रयास करेंगे। इन गतिविधियों से बच्चों में शब्द भंडार, सुनने की क्षमता और आत्मविश्वास विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
कक्षा तीन में भूमिका-अभिनय से सीख
कक्षा तीन के विद्यार्थियों के लिए दादी-नानी की कहानियों को सुनाना, घटनाओं को क्रम में बताना और घर, स्कूल या बाजार जैसे विषयों पर छोटे-छोटे संवाद प्रस्तुत करना शामिल किया गया है। इससे बच्चों की संवाद क्षमता, तार्किक सोच और स्पष्ट अभिव्यक्ति विकसित होगी। इस बार गतिविधियों को बोलना, सुनना, समझना, छोटे वाक्यों में विचार व्यक्त करना और आत्मविश्वास के साथ संवाद करना जैसे स्पष्ट शिक्षण लक्ष्यों से जोड़ा गया है। विभाग का मानना है कि मातृभाषा आधारित प्रारंभिक शिक्षा बच्चों की बुनियादी साक्षरता को मजबूत करती है और आगे की पढ़ाई के लिए मजबूत आधार तैयार करती है।
वर्जन-
जिले के सभी स्कूलों के मुखियाओं को कार्यक्रम की रूपरेखा के बारे में अवगत करा दिया गया है। इस पहल के माध्यम से विद्यालयों में मातृभाषा को केवल एक विषय नहीं, बल्कि सीखने का स्वाभाविक माध्यम बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है। इस वर्ष मातृभाषा दिवस को कक्षा-केंद्रित, सहभागितापूर्ण और सीखने से जुड़ा आयोजन बनाया जा रहा है।
- अंशुल, एफएलएल अधिकारी व जिला समन्वयक