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Karnal News: आय की मामूली विसंगति पर दावा खारिज नहीं कर सकते

Wed, 18 Mar 2026 02:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा क्षेत्र की कंपनी आदित्य बिरला हेल्थ इंश्योरेंस के खिलाफ एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने कंपनी की उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें दावा किया गया था कि मृतक पॉलिसीधारक ने अपनी आय और पेशे की गलत जानकारी दी थी। आयोग ने कहा कि अगर पॉलिसीधारक प्रीमियम भरने की क्षमता रखता है तो आय की मामूली विसंगति क्लेम खारिज करने का आधार नहीं है। आयोग ने कंपनी को शिकायतकर्ता के कानूनी वारिसों को 25 लाख रुपये की राशि का भुगतान करने के साथ-साथ 72 हजार रुपये मुआवजा देने के आदेश दिए हैं।

आयोग के फैसले के अनुसार मूनक गांव निवासी रोहताश (अब मृतक) ने अपनी पत्नी शकुंतला के लिए जून, 2019 में एचडीएफसी बैंक के माध्यम से आदित्य बिरला हेल्थ इंश्योरेंस से 25 लाख रुपये की व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा पॉलिसी खरीदी थी। पाॅलिसी की वैधता 26 जून, 2019 से 25 जून, 2021 तक थी। 22 जनवरी, 2021 को नदी में डूबने से उनकी पत्नी की मृत्यु हो गई। रोहताश ने जब बीमा राशि के लिए दावा पेश किया तो बीमा कंपनी ने उसे यह कहते हुए खारिज कर दिया कि पॉलिसी लेते समय शकुंतला की वार्षिक आय तीन लाख रुपये बताई गई थी, जबकि जांच में उनकी पारिवारिक आय केवल 90 हजार रुपये पाई गई और परिवार मनरेगा में पंजीकृत था।
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कंपनी पेश नहीं कर सकी प्रमाणपत्र
आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह और सदस्यों ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि बीमा कंपनी अपने दावों के समर्थन में तहसीलदार का आय प्रमाणपत्र या मनरेगा पंजीकरण का कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी। अदालत ने कहा बीमा कंपनियां अक्सर पॉलिसी बेचते समय लुभावने वादे करती हैं, लेकिन क्लेम के समय तकनीकी खामियां निकालकर भुगतान से बचने की कोशिश करती हैं। यदि मृतक महिला केवल 4,106 रुपये का प्रीमियम भरने में सक्षम थी, तो उसकी आय को लेकर दिया गया तर्क बेमानी है। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि पॉलिसीधारक प्रीमियम भरने की क्षमता रखता है तो आय की मामूली विसंगति क्लेम खारिज करने का आधार नहीं हो सकती।
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देना होगा 50 हजार रुपये मुआवजा
आयोग ने आदित्य बिरला हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को शिकायतकर्ता रोहताश के कानूनी वारिसों को 25 लाख रुपये की बीमा राशि नाै प्रतिशत ब्याज के साथ देने के आदेश दिए। इसके अलावा आयोग ने उपभोक्ता को हुई मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के लिए 50 हजार रुपये का मुआवजा और मुकदमेबाजी के खर्च के रूप में 22 हजार रुपये का भुगतान करने के आदेश दिए। आयोग ने यह आदेश 45 दिनों के भीतर लागू करने को कहा गया है। हालांकि, एचडीएफसी बैंक के खिलाफ शिकायत को खारिज कर दिया गया, क्योंकि उनकी भूमिका केवल सेवा प्रदाता की थी।
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