फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एनडीआरआई में भैंसों की मौत पर मौत, रिपोर्ट पर चुप्पी

विज्ञापन
विज्ञापन
करनाल। राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान में रुक रुककर भैंसें मरतीं जा रहीं हैं। संस्थान के वैज्ञानिकों ने इस बीमारी के सामने अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। मंगलवार रात को एक भैंस के और मरते ही संस्थान के वैज्ञानिकों के मुताबिक अब तक मरने वाले पशुओं की संख्या 47 के आंकड़े तक पहुंच गया है। मुर्राह नस्ल की भैंसों के मरने का सिलसिला रुक रुककर 15 दिन से चल रहा है और वैज्ञानिक कुछ भी बता पाने की स्थिति में नहीं हैं। 15 दिन के दौरान इंडियन वेटरनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट बरेली, लाला लाजपत राय वेटरनरी यूनिवर्सिटी हिसार के अलावा संस्थान के सीनियर वैज्ञानिकों तक ने जो सैंपल लिए थे, उसकी रिपोर्ट मीडिया के समक्ष सार्वजनिक नहीं कर पाई है। संस्थान के प्रवक्ता डॉ. राजन शर्मा नपी-तुली बात कर रहे हैं। देश के जाने-माने विशेषज्ञ पशुओं की मौत का राज नहीं खोल सके हैं। संस्थान के निदेशक डॉ. आरआरबी सिंह इस मामले को लेकर सामने नहीं आ रहे हैं। जानकारी के अनुसार संस्थान में जिन भैंसों की मौत हुई है, उन पर दूध बढ़ाने का अनुसंधान चल रहा था। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब किसी बीमारी से भैंसों की मौत नहीं हुई है तो अचानक इतने पशुओं की मौत कुछ दिनों के अंतराल पर कैसे हो गई। इनमें से बीमार पशु भी दम तोड़ रहे हैं। चर्चाओं के अनुसार जब कुछ भी नहीं है तो पशुओं में दूध बढ़ाने का जो अनुसंधान चल रहा है उस तरफ अंगुलियां उठनी शुरू हो गई हैं। इसी कारण बरेली, हिसार से आए वरिष्ठ वैज्ञानिकों की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई। चर्चाओं के अनुसार इस मामले को दबाने की पुरजोर कोशिश की जा रही है। पशु प्रेमियों के अलावा अन्य लोगों का कहना है कि अब एनडीआरआई सवालों के घेरे में नजर आ रही है। संस्थान में बहुत कुछ ऐसा चल रहा है जो नहीं होना चाहिए।
विज्ञापन

यह उठ रहे सवाल
- देश के शीर्ष संस्थान 14 दिन बाद तक भी भैंसों की मौत का कारण क्यों नहीं ढूंढ सके?
- ऐसी कौन सी बीमारी है जो केवल संस्थान के कैटल यार्ड में ही आई और उसको नियंत्रित करने की विधि ही नहीं?
- अब तक जितने भी टेस्ट व पोस्टमार्टम करवाए गए उनकी रिपोर्ट का खुलासा क्यों नहीं किया जा रहा ?
- जब देश के जाने माने विशेषज्ञ किसी नतीजे पर नहीं पहुंच रहे तो भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद विदेश से अनुसंधानकर्ता क्यों नहीं बुला रहा ?
- आईवीआरआई बरेली का वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. भोजराज सिंह सरकार से जांच की इजाजत मांग रहा है तो उसे इजाजत क्यों नहीं दी जा रही ?
- एनडीआरआई प्रबंधन किसी भी सवाल का जवाब देने से क्यों कतरा रहा है। क्या किसी राज को दबाने की कोशिशें की जा रही हैं?
- देश के अनुसंधान जगत को इतना बड़ा नुकसान हुआ है क्या उसके लिए केवल अफसोस ही जताते रहें?
दो दिन की जांच में नहीं मिला कोई कारण
जांच कर लौटे आईवीआरआई बरेली के पूर्व ज्वाइंट डायरेक्टर विशेषज्ञ डॉ. रिशेंद्र वर्मा का कहना है कि जांच में ऐसा कोई कारण नहीं मिला कि किसी जीवाणु, कीटाणु, विषाणु से पशु मरे हों। कोई गंभीर बात नहीं मिल सकी। उन्होंने तमाम तरह की जांच की है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट देखी हैं। किसी संक्रमण या बीमारी से पशु नहीं मरे हैं। उन्होंने एक-एक जानवर को चेक किया है। उनके स्वास्थ्य को लेकर सुझाव भी दिए हैं। उन्हें उम्मीद है कि जल्द स्थिति सामान्य होगी। अब पशुओं की मौत नहीं होगी। वह जल्द अपनी रिपोर्ट तैयार करके देंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें