राजा कर्ण का शहर करनाल मंगलवार को घनी गहरी धुंध की चादर में लिपटा रहा।
धुंध होने के कारण सोमवार के मुकाबले विजिबिलिटी चार से पांच मीटर से घटकर मात्र दो मीटर तक रह गई, वहीं, वाहनों की रफ्तार भी मंगलवार को बेहद धीमी नजर आई। अधिकतम तापमान में चार डिग्री सेल्सियस से अधिक की कमी आना दर्ज किया गया है।
न्यूनतम तापमान भी सोमवार के मुकाबले आधा डिग्री कम होने के साथ मात्र सात डिग्री सेल्सियस रह गया। मौसम वैज्ञानिकों ने पूरे हाल का विस्तार से आंकलन करने के साथ अगले 24 घंटे में और धुंध गिरने की आशंका जताई है। मौसम विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार मंगलवार को अधिकतम तापमान 20.2 डिग्री दर्ज किया गया, जबकि सोमवार को अधिकतम तापमान 24.4 डिग्री दर्ज किया गया।
ऐसे ही न्यूनतम तापमान भी सोमवार को 7.5 डिग्री दर्ज किया गया था, जो मंगलवार को आधा डिग्री टूटने के साथ सात डिग्री रह गया। वाहन चालकों को धुंध के कारण वाहन चलाने में भारी दिक्कतें उठानी पड़ीं। दस फुट तक की दूरी से भी कुछ नजर नहीं आ रहा था।
खुले क्षेत्रों में तो धुंध के कारण और अधिक परेशानी रही। मौसम विभाग के अनुसार मंगलवार को विजिबिलिटी सोमवार के मुकाबले दो से तीन मीटर घटकर मात्र दो मीटर रह गई। बुधवार को इससे भी कम रहने की संभावना जताई गई है। सुबह करीब दस बजे के बाद ही आसमान में धूप खिलने लगी तो धुंध भी छंटने लगी। इससे पूर्व वाहन चालकों को फॉग लाइटें जलाकर गुजरना पड़ा।
हाईवे पर चालकों ने अपने वाहनों के बिलंकर भी जलाए रखे। दोपहिया वाहन चालकों को बेहद परेशानी उठानी पड़ी। उन लोगों को हेल्मेट का प्रयोग करने में भी परेशानी आई। दोपहिया वाहन चालकों को भी बिल्कुल नजदीक से कुछ नजर नहीं आ रहा था।
धुंध से किसानों के चेहरे पर रौनक
जुंडला क्षेत्र में मंगलवार को सुबह पड़ी घनी धुुंध से किसानों के चेहरे खिल उठे। किसानों का मानना है कि धुंध से फसलों पर अच्छा प्रभाव देखने को मिलेगा और फसलों की बढ़ोतरी में मदद मिलेगी। कृषि अधिकारियों का कहना है कि ठंड पड़ने के इस संकेत से फसलाें को लाभ होगा और उत्पादन क्षमता भी असर पडे़गा।
जहां गेहूं की फसल को धुंध का लाभ पहुंचने की बात सामने आई, वहीं, यातायात पर धुंध का विपरीत प्रभाव भी देखने को मिला। सड़कों पर वाहन चालकों को दिन में लाइटें जलाकर सफर करना पड़ा और वाहन रेंगकर चले। किसान रामसिंह, जयनारायण, ओमदत्त, पालाराम, किशनाराम, बिशनसिंह, बिच्छाराम, नौरता राम, अवतार, परमजीत सिंह, बलबीर सिंह, सुरेश कुमार, हरिसिंह, पृथ्वीसिंह चौहान, सतपाल सिंह का कहना है कि गेहूं की फसल के लिए ठंड पड़ना बहुत जरूरी होता है, जिससे गेहूं के बूटे फूट करते हैं।
इससे खरपतवार नाशक दवाइयों के स्प्रे के खर्चे से भी छुटकारा मिल जाता है। गेहूं के बूटे फूट करने के बजाय नालियां चढ़ने का खतरा बन गया था।
मंगलवार को पड़ी धुुंध की बूंदें गेहूं की फसल पर प्राकृतिक खाद बनकर बरसी हैं, जिससे खासा लाभ होगा। कृषि विकास अधिकारी डॉ. सुनील कुमार का कहना है कि गेहूं की फसल में ठंड के चलते खासा लाभ पहुंचने के आसार होते हैं और उत्पादन क्षमता पर भी इसका अनुकूल प्रभाव पड़ता है।
धुंध के साथ सर्दी का भी दिखा असर
नीलोखेड़ी में सर्दी बढ़ने के साथ घनी धुंध ने अपने पांव पसराने शुरू कर दिए हैं। घनी धुंध के कारण वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। धुंध का प्रकोप लगातार बढ़ने के कारण वाहनों की गति के साथ-साथ लोगों के काम पर भी ब्रेक लग गए हैं।
धुंध के साथ साथ ठंड भी कहर बरपाने लगी है। सोमवार से लगातार दूसरे दिन भी क्षेत्र में घने कोहरे का प्रकोप रहा। वाहन चालक दस किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से वाहन नहीं चला पा रहे थे। इस कारण जीटी रोड पर जाम जैसी स्थिति बनी रही। वाहन चालकों को घने कोहरे के कारण भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। रात को कई वाहन सड़कों के किनारे खडे़ रहे।
दिल्ली जाने वाले वाले वाहन चालकों के अनुसार घने कोहरे के चलते वाहन के आगे कुछ भी दिखाई नहीं दिया, जिस कारण सावधानी बरतनी पड़ी। घने कोहरे के कारण आम आदमी व वाहन चालकों को परेशानी हो रही है, वहीं, किसानों की बाछें खिल उठी हैं।
किसान हरजिंदर सिंह ने बताया कि जितनी अधिक ठंड बढे़गी, गेहूं को उतना ही फायदा होगा। घने कोहरे के कारण स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को परेशानी को सामना करना पड़ रहा है। बच्चों को स्कूल जाने के लिए रास्ते में कुछ नहीं दिखाई पड़ रहा था। बच्चों का कहना है कि घने कोहरे कारण स्कूल के रास्ते में 5 मीटर की दूरी तक कुछ नहीं दिखाई पड़ रहा था।