संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना के तहत एक जनवरी से 15 जनवरी तक होने वाले शीतकालीन अवकाश में निपुण मिशन कार्यक्रम के तहत गृहकार्य में बदलाव किया गया है। अब बच्चे अनुभव आधारित ज्ञान लेंगे। इसमें दादा-दादी, नाना-नानी मैटर की भूमिका निभाएंगे।
इस संदर्भ में शिक्षा निदेशालय की ओर से आदेश भी जारी हो चुके है। शनिवार को जिले के 484 प्राथमिक विद्यालयों में पीटीएम का आयोजन किया गया। इस दौरान बच्चों के अभिभावकों से शिक्षा विभाग द्वारा राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की अनुपालना में जारी गृह कार्य की पाठ्य सामग्री के बारे में विस्तार से चर्चा की। अध्यापकों ने अभिभावकों को निर्देश दिए कि इस पाठ्यक्रम में बच्चों के नाना-नानी, दादा-दादी एवं बड़े सदस्य मैटर की भूमिका में रहेंगे। वह अनुभव के साथ नई नई पीढ़ी को संस्कार, मार्गदर्शन, दक्षता, कौशल, व्यवहार व कुशलता प्रदान करेंगे। विद्यार्थी अपनी पाठशाला में गीत, लोकगीत, पहेलियां, कहानियां, वृतांत, किस्से और विचार, रिवाज परिवार के सदस्यों की पिछली पीढ़ियों की जानकारी, परंपरा भोजन एवं व्यंजन से संबंधित जानकारी प्राप्त करेंगे। बच्चों को जल्दी उठाकर उन्हें ध्यान व योग में लगाने का प्रशिक्षण देना होगा। बच्चों में पौध रोपण व उनकी रख-रखाव की आदत का विकास करना होगा। सोने के समय अपने बच्चों को पंचतंत्र की शिक्षाप्रद कहानी सुनाना। अभिभावक अपने बच्चों को टेलीविजन और मोबाइल से दूर रखेंगे। पालतू पशुओं की देखरेख और पारिवारिक व्यवसाय का कार्य अपनी देखरेख में कराएं।
शीतकालीन सत्र के दौरान गृह कार्य में लेखन और पढ़ने की प्रवृत्ति की अपेक्षा अनुभव आधारित सीख पर बल दिया गया है। यह होमवर्क परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर किया जाना है, जिसमें अभिभावकों की बड़ी भूमिका रहेगी। अभिभावक मैटर की भूमिका में रहकर बच्चों का मार्गदर्शन करेंगे। -विपिन कुमार, जिला निपुण समन्वयक