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नशे की जद में बचपन : कक्षा 4 छात्र भी कर रहे नशा

Sat, 22 Nov 2025 02:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल।
नशे की चपेट में अब बचपन भी आ गया है। कक्षा चार के छात्र भी नशीले पदार्थों का सेवन करते पकड़े जा रहे हैं। पुलिस, शिक्षा विभाग, नार्कोटिक्स और स्वास्थ्य विभाग की जांच में कम उम्र के बच्चे और युवाओं को नशीले पदार्थ के साथ पकड़ा गया है। आठ से नौ साल तक के बच्चे भी नशे की चपेट में आ रहे हैं। चौथी-पांचवीं कक्षा के छात्र तंबाकू और ई-सिगरेट जैसे शुरुआती नशे में फंस रहे हैं।
कॉलेजों में पढ़ने वाले युवा छात्र मेडिकल इंजेक्शन, ई-सिगरेट और अन्य नशीले पदार्थों के साथ पकड़ में आए हैं। किसी के बैग से नशीला पदार्थ मिला तो कोई बाथरूम में सेवन करता हुआ पकड़ा गया। युवा सुनसान जगहों पर नशीले पदार्थ का सेवन करते पकड़े गए हैं। 17 से 25 वर्ष तक के युवा सुनसान जगहों और खेतों में इकट्ठा होकर नशा कर रहे हैं। कॉलेजों में इंजेक्शन आधारित नशे और दर्द निवारक दवा से नशे के मामले बढ़ रहे हैं।
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स्कूलों में स्थिति डराने वाली है। कई स्थानों पर ई-सिगरेट और दूसरे नशीले पदार्थ मिलने की पुष्टि हुई है। जिला नागरिक अस्पताल से काउंसलर हर्षित ने बताया कि शिक्षक व प्राध्यापक बताते और दिखाते हैं कि उनके स्कूल में चौथी और पांचवीं कक्षा के बच्चे तक शौचालयों में जाकर पेन से पारे का नशा कर रहे हैं। रिफिल वहीं छोड़ दिए जाने से इस बात का खुलासा हुआ है।काउंसलर हर्षित ने बताया कि कक्षा 12 के विद्यार्थी स्मैक का नशा सबसे अधिक कर रहे हैं। बड़ा गांव और निगदू का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि वहां शिक्षकों ने बच्चों को सरेआम नशा करते हुए पकड़ा।

435 गांवों में आधे से ज्यादा नशे के आदी

हर्षित ने बताया कि जिले के 435 पंचायती गांवों में आधे से ज्यादा आबादी नशे की गिरफ्त में है। कूल लिप, वाइन, गांजा, भांग, दारू, नशीली दवा, स्मैक, पारे, पेनकिलर, सुल्फा आदि का नशा छोटे बच्चों से लेकर 25 वर्ष की उम्र तक के युवा कर रहे हैं। नशा भी उम्र के अनुसार दो श्रेणियों में हो रहा है। आठ या नौ साल के बच्चे और 16 से 17 वर्ष के किशोर हल्का नशा तो युवा ज्यादा खतरनाक नशा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जिज्ञासा में या दोस्तों व परिवार के बुजुर्ग लोगों को देखते हुए नशा करने की शुरुआत होती है। इनमें अधिकतर मजदूर वर्ग के परिवारों के बच्चे शामिल होते हैं। धीरे-धीरे लत पड़ जाती है।
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जिले को नशा मुक्त करने के लिए स्वास्थ्य विभाग जोर शोर से अभियान और नशा मुक्त मुहिम चला रहा है। बच्चों और युवाओं को जागरूक करने के लिए स्कूल व कॉलेजों में रोजाना व्याख्यान दिए जा रहे हैं और सोशल मीडिया के माध्यम से नशा न करने की शपथ दिलाई जा रही है। 9 अक्तूबर से 60 दिनों के जन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। - डॉ. सौभाग्य कौशिक, मनोरोग विशेषज्ञ, जिला नागरिक अस्पताल
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