करनाल। गर्मी में शरीर का रासायनिक संतुलन बिगड़ने से बच्चे परेशान हो रहे हैं। उनमें सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, बेचैनी, नींद की कमी, गुस्सा और सबसे अहम पढ़ाई से ध्यान भटकने जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं। जिला नागरिक अस्पताल की मनोरोग ओपीडी में बीते दो दिनों में 20 से अधिक बच्चे इन समस्याओं को आए हैं।
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सौभाग्य कौशिक के अनुसार, इन मामलों को पहले सिर्फ मानसिक तनाव का नाम दिया जाता था, लेकिन विशेषज्ञ अब इसे हीटइंड्यूस्ड न्यूरो साइकोलॉजिकल इम्पैक्ट मान रहे हैं। उनका मानना है कि ये एक ऐसा इंपैक्ट है, जो आगे चलकर बच्चों के मस्तिष्कीय विकास पर गहरा असर डाल सकता है। तेज गर्मी में शरीर का तापमान बढ़ता है और दिमाग की थर्मल रेगुलेशन क्षमता गड़बड़ा जाती है। इसके कारण मस्तिष्क में सेरोटोनिन, डोपामिन और कॉर्टिसोल जैसे रसायनों का संतुलन बिगड़ जाता है। ये केमिकल्स हमारी नींद और सोचने की क्षमता को नियंत्रित करते हैं। जब इनका स्तर असामान्य हो जाता है, तो बच्चा बिना किसी स्पष्ट वजह के बेचैन, गुस्सैल और ध्यानहीन हो जाता है। यही कारण है कि कई बच्चे इन दिनों स्कूल में कमजोर प्रदर्शन कर रहे हैं और घर पर भी एकांत पसंद करने लगे हैं।
8 से 15 वर्ष के बच्चे अधिक
मानसिक थकावट की वजह से छोटे बच्चों में व्यवहार संबंधी गड़बड़ियां बढ़ रही हैं। किशोरों में चुप्पी, गुस्सा और असहजता के लक्षण उभर रहे हैं। गर्मी में जब मस्तिष्क को राहत नहीं मिलती, तो उसका सीधा असर ध्यान और व्यवहार पर पड़ता है।
-शांत वातावरण में बैठने दें
डॉ. सौभाग्य कौशिक ने बताया कि गर्मी में केवल ठंडा पानी या जूस देना ही काफी नहीं है। बच्चों को दिन में कुछ मिनट शांत वातावरण में बैठने का समय देना चाहिए। शोर और गैजेट्स से दूर रखना चाहिए। बच्चों के कमरे में तापमान संतुलित रखना, दोपहर में पढ़ाई के बजाय हल्की गतिविधि देना, और शाम के समय उन्हें आउटडोर समय देना जरूरी हो गया है।