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20 से शुरू हो रहा चतुर्मास, वर्जित होंगे मांगलिक कार्य, चार माह तक पूजा-पाठ और भक्ति का है विशेष महत्व

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20 जुलाई से चतुर्मास की शुरुआत हो रही है, जो 14 नवंबर को खत्म होगा। हिंदू धर्म के साथ ही जैन और बौद्ध धर्मों में भी चतुर्मास का विशेष महत्व बताया गया है। हिंदु धर्म के अनुसार इस दौरान विवाह सहित अन्य शुभ कार्य वर्जित माने गये हैं। वहीं चतुर्मास में जैन और बौद्ध मुनि अपना विहार बंद कर एक ही जगह रहकर जप-तप-मौन साधना आदि करते हैं।
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धर्म वैज्ञानिकों के अनुसार चतुर्मास का महत्व केवल धार्मिक ही नहीं है, बल्कि इसका वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी है। वर्षा काल के ये चार माह खानपान में अत्यंत सावधानी बरतने वाले होते हैं। कारण कि इसमें जहां हमारी पाचनशक्ति कमजोर पड़ती है, वहीं भोजन और जल में बैक्टीरिया की तादाद बढ़ जाती है। इस संबंध में पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि चतुर्मास में पूजा-पाठ, व्रत, भक्ति का विशेष महत्व होता है। ध्यान और साधना करने वाले लोगों के लिए ये माह महत्वपूर्ण होते हैं। यह आषाढ़ शुक्ल एकादशी से प्रारंभ होकर कार्तिक शुक्ल एकादशी तक चलता है। इस साल चतुर्मास का आरंभ 20 जुलाई 2021 से हो रहा है जो 14 नवंबर 2021 तक रहेगा। चतुर्मास में श्रावण, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक चार माह होते हैं। चतुर्मास के प्रारंभ को देवशयनी एकादशी और अंत को देवोत्थान एकादशी भी कहा जाता है।
चतुर्मास में दूध, दही, तेल, बैंगन, पत्तेदार सब्जियां, नमकीन या मसालेदार भोजन, मिठाई, सुपारी, मांस और मदिरा का सेवन नहीं किया जाता। पंडित विशाल शांडिल्य के अनुसार श्रावण में पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, साग, भाद्रपद में दही, आश्विन में दूध, कार्तिक में प्याज, लहसुन और उड़द की दाल का त्याग कर दिया जाता है।
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