- सुबह सर्वधर्म एकता की प्रतीक शोभायात्रा में श्रीराम लला और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की निकाली झांकी
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। दमादम मस्त कलंदर, अली दा पहला नंबर की मस्ती देर रात तक हजरत इलाही बू अली शाह कलंदर साहिब की दरगाह पर गूंजती रही। मौका था उर्स मेले का जिसमें दूर-दूर से आए कव्वालों ने बाबा की शान में कसीदे पढ़े। हजरत इलाही बू अली शाह कलंदर साहिब की दरगाह पर आयोजित उर्स के अवसर पर रविवार सुबह चादरपोशी की गई।
गद्दीनशीन गुरु रामकरण के साथ सभी श्रद्धालुओं ने बू अली शाह कलंदर साहिब की दरगाह पर चादर और पुष्प चढ़ाकर विश्व कल्याण की दुआ की। सुबह सर्वधर्म एकता की प्रतीक शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें श्रीराम लला की भव्य झांकी, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की झांकी के साथ बाबा कलंदर साहिब का स्वरूप आकर्षण का केंद्र रही। चांद सराय से निकली शोभायात्रा, बांसों गेट, चौड़ा बाजार, सराफा बाजार, कर्ण गेट, भगवान वाल्मीकि चौक, पुरानी सब्जी मंडी से होते हुए दरगाह पर विश्राम लिया।
शोभायात्रा का शहर में जगह-जगह पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। शोभायात्रा में महिलाएं चादर लेकर लंबी कतारों में चल रही थी। इस दौरान श्रद्धालु घोड़े पर सवार होकर हाथों में पंखे लेकर चल रहे थे। रविवार रात को सूफी गायिका शाह सिस्टर्स ने बाबा की शान में कशीदे पढ़ते हुए, तेरा दामन न छोड़ेंगे बू अली शाह बाबा तेरा दामन न छोड़ेंगे और तेरा नचना देखके बुल्लया मैंनू चेते आंदे नै कव्वाली पेश की।
वहीं सूफी गायक असलम मुकर्रम साबरी ने क्यूं आके रो रहा है मोहम्मद के शहर में, हर मर्ज की दवा है मोहम्मद के शहर में कव्वाली गाकर सभी को भाव विभोर कर दिया। इस दौरान आयोजित भंडारे में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। हजरत इलाही बू अली शाह कलंदर साहिब की दरगाह को सुंदर लाइटों से सजाया गया।