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Karnal News: मताधिकार को शतायु ने मान तो दिव्यांगों ने बताया शान

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सुखदेव चौहान
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करनाल। चुनाव लोकतंत्र का ऐसा महापर्व है जो पांच वर्ष में आयोजित किया जाता है। इस त्योहार में सभी मतदाताओं की वोट रूपी आहुतियां जरूरी है। इस बार नगर पार्षद के चुनाव के लिए करनाल नगर निगम क्षेत्र में 265 बूथ बनाए गए। इन बूथों पर दिव्यांग, शतायु, नए वोटरों, विदेश से आए हुए लोगों ने भी मतदान किया।
शतायु वोटरों ने मताधिकार को अपना मान बताया तो दिव्यांग ने शान। उनका कहना था कि हर व्यक्ति को लोकतंत्र के महापर्व में अपनी भागीदारी जरूर देनी चाहिए। शहर के विकास के लिए निर्भय व निष्पक्ष होकर मतदान जरूरी है।
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चुनाव के दौरान किया गया प्रलोभन पांच साल तक गले की फांस बन जाता है। लोकसभा, विधानसभा या पार्षद कोई भी चुनाव हो मतदान जरूरी है। समाज हित में किया गया एक-एक वोट विकास की नई पटकथा लिखता है।
व्हील चेयर पर पहुंचकर किया मतदान : शिव कॉलोनी के शिव पब्लिक स्कूल में वोट के लिए आए 40 वर्षीय दिव्यांग वोटर काला ने बताया कि वह दिव्यांग होने के बावजूद हर बार लोकतंत्र के महापर्व में हिस्सेदारी के लिए आता हूं। व्हील चेयर पर लोगों की मदद से मतदान के लिए आता हूं। निष्पक्ष होकर मतदान करता हूं।
वोट की मह्ता को समझना होगा : राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय प्रेमनगर में व्हील चेयर पर पहुंचे दिव्यांग वोटर सुरेश ने बताया कि वोट की महत्ता चुनाव के दौरान मतदान करने पर ही है। अज्ञानता व मजबूरी के कारण अपना वोट खराब करना ठीक नहीं है। जब वह दिव्यांग होते हुए भी बूथ पर पहुंच सकता है तो अन्य क्यों नहीं।
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सभी चुनावों में किया मतदान : राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय प्रेमनगर के बूथ पर वोट के लिए पहुंचीं 88 वर्षीय प्यार कौर ने बताया कि उन्हें लोकतंत्र के इस महापर्व का बेसब्री से इंतजार रहता है। वह मानती हैं कि किसी भी क्षेत्र की पूर्ण नागरिकता तभी मानी जाती है, जब आप क्षेत्र के विकास के लिए मतदान करें। अभी तक जितने चुनाव सामने आए हैं, सभी में मतदान किया है। संवाद
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