करनाल। स्कूल ड्यूटी के साथ जनगणना का कार्य उन शिक्षकों के लिए मुश्किल बन रहा है, जिनकी ड्यूटी स्कूल से 15 से 20 किलोमीटर दूरी पर लगी है। ये स्कूल समय के पहले या बाद में मकान गिनने नहीं पहुंच पा रहे हैं। क्षेत्र अनजान होने के कारण कुछ शिक्षक नक्शों में ही उलझ कर रह गए हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि नक्शे में जो गली या मकान दिखाए हैं, वे किस क्षेत्र में पड़ते हैं। ऐसे शिक्षक अध्यापक संघ व अन्य माध्यम से प्रशासन से ड्यूटी रिवाइज कराने के लिए रास्ते खोज रहे हैं।
इधर शिक्षा निदेशक की ओर से आदेश जारी किए गए हैं कि जनगणना कार्य से स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए। शिक्षक स्कूल समय से पहले, बाद में या खाली पीरियड के समय यह कार्य करेंगे। शिक्षकों का कहना है कि दूरी ज्यादा होने के कारण छुट्टी के बाद संबंधित क्षेत्र या गांव में पहुंचने में ही शाम हो जाती है। तीन-तीन गांवों का इलाका दिया गया है। जिन पटवारियों की ओर से नक्शे बनाकर दिए गए हैं, वे ही अब कॉल रिसीव नहीं करते। ऐसे में उन्हें नजरी नक्शे तैयार करने में भी दिक्कत आ रही है।
जिले में 3811 कर्मचारियों की जनगणना कार्य में ड्यूटी लगी है, इनमें 3500 शिक्षक हैं। अमर उजाला टीम ने अलग-अलग स्कूलों से जानकारी जुटाई तो सामने आया कि स्कूलों के 90 प्रतिशत तक स्टॉफ की ड्यूटी लगाई गई है। प्रेमनगर के राजकीय कन्या विद्यालय में 40 में से 25 और लड़कों के विद्यालय में 30 में से 28 शिक्षकों की जनगणना कार्य में ड्यूटी है। दोनों विद्यालयों के कुछ शिक्षकों की ड्यूटी भी शहर से बाहर या विद्यालय से ज्यादा दूर है।
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शिक्षकों की परेशानी
1. गणना की ड्यूटी स्कूल से ज्यादा दूरी पर है।
2. जनगणना कार्य के मानदेय के बारे स्पष्ट नहीं है।
3. नक्शे धुंधले हैं, इससे क्षेत्र समझने की दिक्कत है।
4. पढ़ाई के साथ गणना ड्यूटी का सामंजस्य नही बैठ पा रहा।
एडीसी ने बताए समाधान
1. जांच करा लेंगे, कुछ क्षेत्रों में शिक्षक कम होने पर ऐसा हो सकता है
2. जनगणना कार्य का मानदेय तय है, प्रत्येक ड्यूटी कर्मचारी को मिलेगा।
3. यदि नक्शे धुंधले हैं तो इसे गूगल मैप की मदद से चेक कर सकते हैं।
4. प्रत्येक शिक्षकों को एरिया व 180 मकान आवंटित हैं, सुविधानुसार कार्य कर सकते हैं।
कहीं शिक्षकों की कमी तो कहीं आने-जाने की समस्या
- ऐंचला स्कूल के मुख्याध्यापक रमेश कुमार का कहना है कि उनके छह शिक्षकों में से दो डेपूटेशन पर हैं, दो की जनगणना ड्यूटी है। दो शिक्षक ही कक्षाएं लेते हैं। अभी तो काम चल रहा है, आगे दिक्कत आ सकती है।
- पीएमश्री जीजीएसएसएस गोंदर के शिक्षक विनोद ने बताया कि पटवारियों के दिए नक्शे से क्षेत्र समझ नहीं आ रहा। अनजान क्षेत्र में यह समझना मुश्किल है कि किस गली और मकान तक उन्हें कवर करना है।
- गोंदर स्कूल की महिला शिक्षक की ड्यूटी गुनियाना सहित अन्य दूर के गांवों में लगी है, उनका कहना है कि इस मार्ग पर बस संचालन नहीं है, आने-जाने में परेशानी होती है।
- शिक्षक कृष्ण निर्माण ने बताया कि दूर की ड्यूटी के शिक्षकों को व्यवस्था बनाने में परेशानी है। यदि जनगणना के लिए जाएं तो पढ़ाई छूटती है, स्कूल आएं तो कार्य क्षेत्र पहुंचने तक शाम हो जाती है।
- अध्यापक संघ के अध्यक्ष अनिल सैनी ने बताया कि प्रशासन की ओर से दिए नक्शे धुंधले हैं, इनमें एरिया साफ न होने से क्षेत्र की पहचान करना मुश्किल बना हुआ है।
मांग : ड्यूटी भले न काटें पर इंटरचेंज कर मिले राहत
अध्यापक संघ के प्रधान अनिल सैनी, कृष्ण निर्माण का कहना है कि वे प्रशासन से जनगणना कार्य से ड्यूटी काटने के लिए नहीं कह रहे। शिक्षकों के आग्रह पर विचार करके ड्यूटी इंटरचेंज की जानी चाहिए। उनका कहना है कि कुछ शिक्षक अपने स्तर पर दूसरे शिक्षक को पीरियड सौंपकर या एडजस्ट करके जनगणना कार्य करने के लिए मजबूर हैं।
वर्जन
सभी शिक्षकों की जांच के बाद ही ड्यूटी सौंपी गई है। यदि कहीं शिक्षक की दूरी ज्यादा दूर लगी है तो उसे चेक करवा लेंगे। शिक्षक दो दिन में या रोजाना अपनी सहूलियत के अनुसार कार्य कर सकते हैं लेकिन कार्य 30 मई तक पूरा करना है। - डॉ. राहुल रईया, एडीसी करनाल