करनाल। धान के उठान में देरी, बारिश से बचाव के इंतजाम में लापरवाही और बेपरवाह अधिकारी। वीरवार को बारिश के कारण मंडियों में करीब 1.80 लाख मीट्रिक टन धान भीगने के मुख्य तीन कारण रहे। लापरवाही इतनी कि मौसम विभाग के बारिश के अलर्ट के बावजूद तिरपाल का इंतजाम नहीं किया गया। तिरपाल की कमी से भी बहुत नुकसान हुआ। भीगे धान में ज्यादातर सरकारी एजेंसियों का खरीदा हुआ है। किसानों के करीब 30 हजार मीट्रिक टन धान को नुकसान होने का अनुमान है।
मंडियों में धान की खरीद के बाद समय पर उठान नहीं होने से खुले में रखा अनाज मौसम की मार झेल रहा है। बार-बार भीगने से धान की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। इसका असर किसानों की फसल और सरकारी खरीद व्यवस्था, दोनों पर पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि मंडियों में तिरपाल के इंतजाम भी नाकाफी हैं। इससे भी नुकसान बढ़ रहा है।
अब तक चार बार हुई बारिश के दौरान मंडियों में करीब 4.20 लाख मीट्रिक टन धान प्रभावित होने का आंकड़ा सामने आया है। लगातार बारिश और धीमे उठान ने मंडियों में भंडारण की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि खरीदे गए धान का समय रहते उठान नहीं हुआ तो नुकसान बढ़ने की आशंका बनी रहेगी।
करनाल में पोर्टल दोबारा नहीं खुला
धान खरीद से जुड़ी समस्याओं के बीच करनाल में पोर्टल दोबारा नहीं खोला गया है। जिन किसानों की धान की पैदावार 25 क्विंटल से ज्यादा हुई थी उस फसल का पोर्टल पर सत्यापन होना था। अब किसानों को पटवारी या तहसीलदार से खेत के रकबे का सत्यापन कराना होगा।
हमने बुधवार को ही आढ़तियों को तिरपाल की व्यवस्था कराने को लेकर नोटिस जारी कर दिया था, जो धान भीगा है उसमें से ज्यादातर सरकार का है। भीगे गए धान को लेकर जवाब मांगा जाएगा। मंडी में सुखाने के लिए जगह की व्यवस्था कराई जाएगी। - विकास गुप्ता, मंडी सचिव, करनाल
किसानों के भुगतान में रुकावट
इंद्री। वीरवार सुबह हुई बारिश ने इंद्री अनाज मंडी में खुले में रखी धान की बोरियों को भिगो दिया। उठान का काम धीमा होने से मंडी में धान का ढेर लगा हुआ है, जिससे किसानों के खातों में भुगतान भी रुक गया है। किसान रिषिपाल, अनिल कांबोज और बलवान ने कहा कि त्योहार सिर पर हैं, लेकिन धान बेचने के बाद भी उनके खाते में भुगतान नहीं आया है। उन्होंने कहा कि बिना पैसे के घर पर त्योहार मनाना मुश्किल हो रहा है। मंडी प्रधान सुमेर चंद कांबोज ने बताया कि बारिश में भीगा धान राइस मिलर्स का है, इससे किसानों को कोई नुकसान नहीं हुआ है।
इंद्री अनाज मंडी में पड़ी बोरियों में अंकुरित होता धान। संवाद