करनाल। बदलती जीवनशैली और खान-पान की आदतों का असर अब बच्चों के स्वास्थ्य पर साफ दिखाई देने लगा है। जिला नागरिक सिविल अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 15 से 20 ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जिनमें बच्चों में कैल्शियम की कमी पाई जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि यह समस्या तेजी से बढ़ रही है और समय रहते इस पर ध्यान देना जरूरी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों के आहार में दूध, दही, पनीर और हरी सब्जियों की कमी इसका मुख्य कारण है। आजकल बच्चे जंक फूड और पैकेट वाले खाद्य पदार्थ ज्यादा पसंद करते हैं, जिससे शरीर को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते। इसका सीधा असर उनकी हड्डियों और दांतों की मजबूती पर पड़ता है। जनरल फिजीशियन डॉ. प्रिया दलाल का कहना है कि कैल्शियम की कमी के कारण बच्चों को हाथ-पैरों में दर्द, कमजोरी और थकान की शिकायत रहने लगती है। कई मामलों में बच्चे रात के समय अधिक दर्द की शिकायत करते हैं जिससे उनकी नींद भी प्रभावित होती है।
बच्चों को रोजाना दूध जरूरी
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. हरजीत सिंह ने सलाह दी है कि बच्चों की डाइट में रोजाना दूध, दही, पनीर और कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें। इसके अलावा, बच्चों को रोजाना कम से कम एक गिलास दूध जरूर देना चाहिए। साथ ही, बादाम और अंजीर जैसे ड्राई फ्रूट्स भी उनके आहार में शामिल करने की सलाह दी। इनमें कैल्शियम और विटामिन की भरपूर मात्रा होती है। उन्होंने कहा कि बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच जरूरी है। हर तीन महीने में बच्चों का चेकअप कराना चाहिए। बच्चों को बाहर खेलने और धूप में समय बिताने के लिए भी प्रेरित करना चाहिए। धूप से मिलने वाला विटामिन-डी कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है।