जिले के राजीव गांधी खेल परिसर खस्ताहाल, नहीं दे रहा कोई ध्यान
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिले में करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए सात राजीव गांधी खेल परिसरों की हालत खस्ता है। यहां बने भवनों की खिड़की के दरवाजे टूटे हैं। मैदान पर झाड़ियां उगी हैं। देखरेख के अभाव में ये मैदान खेलने लायक नहीं हैं। बसताड़ा गांव का खेल परिसर का भवन भी जर्जर हो चुका है। पेंट उखड़ चुकी है। शौचालयों की हालत खराब है, बिजली के उपकरण व खिड़की-दरवाजे टूटे हैं। खेल मैदान की देखरेख करने वाला कोई नहीं है। जिले में जब इन खेल परिसरों का निर्माण करवाया गया था तो उस समय खेल विभाग ने दावा किया था कि यहां पर आसपास के खिलाड़ियों का खेल स्तर बेहतर होगा लेकिन समय के साथ-साथ न तो इन मैदानों में युवा खिलाड़ी नजर आते हैं, न ही संबंधित खेल के कोच।
जिले के सात राजीव गांधी खेल परिसरों में गगसीना, कलरी जागीर, निगदू, घोघड़ीपुर, बसताड़ा, पुडंरक, जयसिंहपुरा में भी खेल परिसरों के हालात खस्ता हैं।
नशेड़ियों का बने अड्डा
खिलाड़ी राकेश, राजीव, संजीव, सोनिया, मीनाक्षी ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में बने खेल परिसर नशेड़ियों का अड्डा बन गए हैं। शाम होते ही यहां शरारती तत्व नजर आने लगते हैं। यही नहीं मैदान का निरीक्षण करने पर कई शराब की खाली बोतलें व खाली सीरींज भी मिली हैं। उन्होंने बताया कि गांव के ज्यादातर युवा विदेश पलायन कर गए हैं। जो युवा गांवों में हैं वे सुविधाओं के अभाव में अभ्यास नहीं कर पा रहे हैं।
चार साल पहले हुआ था नवीनीकरण
जिले के सात राजीव गांधी खेल परिसरों का चार साल पहले पंचायती राज विभाग से नवीनीकरण करवाया गया था। यह कार्य करीब दो करोड़ रुपये से हुआ था। नवीनीकरण के बाद देखरेख के अभाव में खेल परिसरों के हालात फिर खस्ता हो चुके हैं।
राजीव गांधी खेल परिसरों के वर्तमान हालात की रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। नवीनीकरण का एस्टीमेट पंचायती राज विभाग से तैयार किया जाएगा। उसके बाद फंड की स्वीकृति मिलते ही नवीनीकरण का कार्य शुरू हो जाएगा। खेल परिसरों में कोच न होने से खिलाड़ियों को परेशानी है, विभाग द्वारा जल्द नए प्रशिक्षक नियुक्त करके खेल परिसरों में भेजे जाएंगे। खिलाड़ियों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं आने दी जाएगी।
- सुधा भसीन, जिला खेल एवं युवा कार्यक्रम अधिकारी, करनाल
24jjrp15- बेरी। कार्यक्रम को संबोधित करते इंद्रेश कुमार। स्त्रोत- आयोजक- फोटो : udhampur