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Karnal News: कोहरे में बिना फॉग लाइट दौड़ रहीं बसें, हादसे का खतरा

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- 50 फीसदी बसों पर नहीं फॉग लाइट और रेडियम टेप, धुंध के कारण घटी रफ्तार, आधे घंटे के सफर में लग रहा एक या सवा घंटा
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- अधिकारी अनजान, खतरे में यात्रियों की जान, दावा- बसों पर कर्मचारी लगा रहे लाइटें

गगन तलवार

करनाल। इन दिनों घना कोहरा छा रहा है, लेकिन रोडवेज के अधिकारियों को यात्रियों और कर्मचारियों की जान की परवाह नहीं है। स्थिति यह है कि कोहरे के कारण इन दिनों दृश्यता 10 मीटर से भी कम है पर रोडवेज बसों पर अभी तक फॉग लाइट और रेडियम टेप नहीं लगाई गईं। ऐसे में चालक-परिचालक जान जोखिम में डालकर सफर करा रहे हैं।

हालात यह हैं कि सामान्य दिनों में आधे घंटे में तय होने वाले सफर में भी अब एक या सवा घंटे तक का समय लग रहा है। हाईवे पर वाहन रेंगते चल रहे हैं। पिछले तीन दिनों में अलग-अलग डिपो की रोडवेज बसें धुंध के कारण हादसे का शिकार हुई हैं। इसके बावजूद करनाल डिपो के अधिकारी बसों पर फॉग लाइटें नहीं लगवा पाए। बुधवार को अमर उजाला संवाददाता ने पड़ताल की तो बस अड्डे या कर्मशाला में खड़ी 50 फीसदी से ज्यादा बसें बिना फॉग लाइटों के थी।
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हालांकि अधिकारियों का दावा है कि लाइटें और टेप लगाई जा रही हैं, लेकिन कर्मशाला में उस समय कोई भी कर्मचारी बसों पर लाइटें लगाता दिखाई नहीं दिया। करनाल डिपो में 164 बसों का बेड़ा है, ये बसें स्थानीय से लेकर अंतरराज्यीय मार्गों पर लोगों को सफर करवाती हैं।



नई एसी और मिनी बसों पर भी नहीं लाइटें

रोडवेज के बेड़े में इस वर्ष करीब चार साल के इंतजार के बाद नई बसें शामिल हुई हैं। इनमें 39 सामान्य बसों के अलावा 10 एसी और 21 मिनी बसें भी शामिल हैं, लेकिन अधिकारियों ने इन बसों पर भी अभी तक फॉग लाइटें नहीं लगवाई हैं। जबकि नई बसें हादसाग्रस्त न हों, इनका विशेष इंतजाम होना चाहिए था। रोडवेज की ओर से नई बसों को लंबी दूरी के मार्गों पर चलाया जा रहा है। जबकि मिनी बसें ग्रामीण मार्गों पर चलती हैं।



पुरानी बसों की टूटी लाइटें भी नहीं बदलीं

संवाददाता ने जब बसों पर लाइटों की पड़ताल की तो जहां नई बसें बिना फॉग लाइट के दिखाई दीं। वहीं कई पुरानी बसों पर भी लाइटें नहीं थी। कुछ बसें ऐसी भी दिखीं जिन पर गत वर्षों में लाइटें लगाई गई थी, लेकिन अब ये लाइटें टूट कर कहीं गिर चुकी हैं, बस के आगे केवल फॉग लाइट का खोल लगा है। इसी तरह रेडियम टेप भी कई बसों पर पुरानी लगी मिलीं। उत्तर प्रदेश और निजी सोसायटी की कई बसों की स्थिति भी कुछ ऐसी ही रही।



एक्सपर्ट व्यू

एक माह पहले होना चाहिए इंतजाम

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ शुभम भारद्वाज और एडवोकेट तेजपाल का कहना है कि अधिकारी अब बसों पर फॉग लाइट लगाने का दावा कर रहे हैं, लेकिन यह इंतजाम तो नवंबर माह की शुरुआत में होना चाहिए। इस बार तो धुंध भी देरी से पड़ने लगी है। बसों पर फॉग लाइटें लगाई जानी जरूरी हैं। कोहरे में दृश्यता कम हो जाती है, जिससे सड़क पर सामने से आ रहा वाहन दिखाई नहीं देता। ऐसे में एक बस में कम से कम दो फॉग लाइटें होनी चाहिए।
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60 बसों पर फॉग लाइट लगाई जा चुकी हैं। रोजाना बसों पर लाइटें और रेडियम टेप लगाने का काम जारी है। एसी व नई बसों पर फॉग लाइट लगी हुई नहीं आतीं, इन पर खुद कर्मचारी लगाते हैं। स्टोर में फॉग लाइटें रखी हैं, एक-दो दिन में सभी बसों पर फॉग लाइटें लगा दी जाएंगी।

- महेश शर्मा, वर्कशॉप मैनेजर, करनाल रोडवेज
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