सीएम सिटी का योजना विभाग जिला योजना स्कीम के तहत आए करोड़ों रुपये के बजट को काफी कोशिशों के बाद भी खर्च नहीं कर पाया। जिसके कारण नये वित्त वर्ष में बचा हुआ सारा पैसा वापस हो गया। यह पैसा डी प्लान के तहत जिले के विकास कार्यों में खर्च करना था। जिला योजना स्कीम के तहत जिले को वित्त वर्ष 2016-17 में सामान्य और एससी-एसटी के मदों में 1187.54 लाख रुपये मिले थे। जिन्हें डी प्लान के तहत सामुदायिक केंद्र, स्कूल, आंगनबाड़ी, गली निर्माण, श्मशान घाट जैसी जगहों के विकास कार्यों पर खर्च करना था। योजना विभाग ने जिले में कई विकास कार्य करवाए भी, लेकिन 31 मार्च तक वह 990.81 करोड़ रुपये ही खर्च कर पाया।
जिस कारण शहर के विकास के लिए आया 196.244 लाख रुपये सरकार के पास वापस चला गया। इस पैसे के वापस जाना जहां जिले के लिए नुकसान दायक माना जा रहा है, वहीं इस वित्त वर्ष में मिलने वाले बजट में भी कटौती हो सकती है। हालांकि बजट को बचाने के लिए योजना विभाग के अधिकारियों ने आखिरी मिनटों तक पूरी कोशिश की थी। 31 मार्च को देर रात तक काम कर योजनाओं की फाइलों को अप्रूव कराकर अधिकारियों ने करीब एक दिन में ही करीब 1.25 करोड़ रुपये के बिल पास कराए थे। योजना विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिले के विकास के लिए काफी कार्य हुए। जो भी कार्य अप्रूव हुए उसको तत्काल पूरा किया गया, लेकिन कई दिक्कतों के कारण बजट पूरी तरह खर्च नहीं हो पाया और वापस चला गया। उम्मीद है कि इस बार लैप्स हुआ बजट भी वापस जुड़ कर मिलेगा। वहीं जिला योजना अधिकारी संगीता मेहता ने कहा कि, बजट को बचाने के लिए हमने काफी मेहनत की, कुछ कारणों से बजट वापस चला गया, अब 15 अप्रैल तक नया बजट आएगा, उसके बाद ही कह सकूंगी कि वापस गया बजट मिला या पूरी तरह लैप्स हो गया।