संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल।
तरावड़ी के ललायणी जोगीमाजरा गांव निवासी मलखान नाथ के दो साल तक चेतराम की जगह जेल में बंद रहने के मामले में डीएसपी सिटी राजीव जांच कर रहे हैं। मामले में मंगलवार को दोनों पक्षों के लोगों को बयान के लिए पुलिस ने बुलाया। दोनों पक्षों डीएसपी के समक्ष बयान दर्ज कराए। अब मामले में सोनीपत के पुलिस कर्मचारियों के बयान होंगे। इसके बाद डीएसपी की तरफ से मामले की जांच रिपोर्ट एसपी करनाल को सौंपी जाएगी।
मामले में डीजीपी ओपी सिंह ने मामले की जांच करनाल एसपी गंगाराम पुनिया को सौंपी थी। मलखान नाथ और उनके अधिवक्ता अशोक चंदानी 9 दिसंबर को करनाल एसपी गंगाराम पुनिया से मिले थे। एसपी ने मामले को उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर होने की बात कहकर मना कर दिया था। इसके बाद 15 दिसंबर को पीड़ित पक्ष के लोग पंचकुला में डीजीपी ओपी सिंह से मिले। मामले की जांच करनाल पुलिस से कर आने की मांग की। इसके बाद जांच करनाल एसपी को सौंपी गई।
मंगलवार को पीड़ित पक्ष की ओर से बयान दर्ज करवाने आए मलखान नाथ ने बताया कि उन्हें डीएसपी राजीव ने बयान के लिए बुलाया था। मंगलवार को उनके साथ पत्नी और गांव के सरपंच के बयान भी दर्ज किए गए। मलखान नाथ ने डीएसपी को बताया कि वो नाथ समुदाय से हैं, उनका काम घूम फिरकर जड़ी-बूटी बेचना और भिक्षा मांगने का है। वर्ष 2022 में आरोपी चेतनाथ के घर गए थे। आरोपी चेतराम की माता ने उनका फोन नंबर लेकर बातचीत शुरू कर दी थी और अपना धर्म का बेटा बना लिया। वह उनके घर दूसरी बार भी गए थे। दिसंबर, 2023 में वो अपने रोजगार के लिए असम चले गए। 11 दिसंबर, 2023 को सीआईए गन्नौर की टीम ने उन्हें लीधूशहर डिब्रूगढ़ से पकड़ा था। टॉर्चर कर कहा कि अदालत में खुद को चेतराम बताना है। पीड़ित का आरोप है कि सोनीपत पुलिस की थर्ड डिग्री के कारण उसकी कई हडि्डयों में फ्रैक्चर आ गया है। पुलिस ने उसे 21 दिसंबर, 2023 को जेल भेज दिया। डीएनए जांच के आधार पर 29 नवंबर 2025 को उन्हें रिहा किया गया।
गांव के सरपंच ने भी कहा कि मलखान नाथ को गलत तरीके से फंसाया गया था। डीएसपी ने दूसरे पक्ष चेतराम के पिता अंग्रेज सिंह, माता बीरो देवी, बहन रोशनी और कविता, बेटे विकास, बेटी मनीषा को बुलाया गया था। पुलिस ने सभी से मामले को लेकर बयान लिए।