खंड घरौंडा के यमुना नदी से सट्टे पांच गांवों में गलत चकबंदी किए जाने के मामला में दोनों पक्षों के 11-11 लोगों के प्रतिनिधिमंडलों ने जिला मुख्यालय पर रोहतक मंडल आयुक्त चंद्रप्रकाश के समक्ष मजबूती के साथ अपना-अपना पक्ष रखा। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
आयुक्त चंद्रप्रकाश, उपायुक्त व एसपी की ओर से दोनों पक्षों को कानूनी प्रक्रिया के तहत न्याय दिलाने का आश्वासन दिया है। इस बात पर दोनों पक्षों के लोग सहमत हो गए। वहीं, मामले में एक पक्ष के लोगों ने एसडीएम और तहसीलदार के समक्ष खुला ऐलान किया कि उन लोगों को 15 दिन में न्याय नहीं मिला तो आंदोलन तेज कर दिया जाएगा।
वे लोग मुख्यमंत्री आवास के बाहर आत्मदाह करेंगे। इसके लिए मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन जिम्मेदार होगा। खंड घरौंडा के गांव लालूपुरा, कालरम, अराईपुरा, भरतपुर व अमृतपुर कलां और खुर्द के पांच गांवों के लोगों के बीच जमीन के कब्जे के लिए पिछले कई साल से विवाद चल रहा है। यह मामला खंड स्तर के अधिकारियों से लेकर राज्य के उच्चाधिकारियों समेत अदालतों तक पहुंच चुका है।
मामले में दोनों पक्षों के बीच कई बार बडे़-बडे़ टकराव हुए। पांचों गांवों को पुलिस को कई बार छावनी बनाना पड़ा। दो दिन पहले भी लालूपुरा को विवाद के बाद पुलिस ने छावनी में तब्दील कर दिया था। दोनों पक्षों के बीच हालात बेहद खराब होते जा रहे थे। पूरे मामले की गंभीरता के मद्देनजर वीरवार को दोनों पक्षों के लोगों ने अपना-अपना पक्ष आयुक्त के समक्ष रखा।
दोनों पक्षों के लोगों ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए। एक पक्ष के लोगों ने कहा कि चकबंदी के नाम पर उन लोगों से भूमाफिया जमीन छीन रहे हैं। दूसरे पक्ष ने कहा कि वे अपना अधिकार मांग रहे हैं। दोनों पक्षों की पूरी सुनवाई के बाद ही मामला किसी समाधान तक पहुंच सकता है। पांचों गांवों की महिलाओं समेत सैकड़ों लोग जिला मुख्यालय पहुंचे थे।
इन लोगों की ओर से इंडिया अगेंस्ट क्रप्शन के सदस्य और एडवोकेट जेपी शेखपुरा, प्रदीप मराठा, रूलिया राम व उनके साथ एडवोकेट प्रतीक शर्मा, एडवोकेट सुरेश शर्मा व एडवोकेट रिशीपाल राणा समेत 11 लोगों का प्रतिनिधिमंडल आयुक्त, उपायुक्त और एसपी से मिला। उन लोगों ने पूरा मामला अधिकारियों के समक्ष रखा। मामले की गहनता और विस्तार से सुनवाई के बाद आयुक्त ने एसडीएम मुकुल कुमार और तहसीलदार हरिओम अत्री को लोगों को आश्वासन देने के लिए भेजा।
दोनों अधिकारियों के आश्वासन देने के पूर्व ग्रामीणोें का नेतृत्व कर रहे प्रदीप मराठा और एडवोकेट जेपी शेखपुरा ने लोगों को बताया कि प्रशासन ने लगभग उन लोगों की पूरी बात मान ली है। मामले को निपटाने के लिए दस किसानों की कमेटी बनाई जाएगी, जो आयुक्त, उपायुक्त, एडीसी, एसडीएम और एसपी के संपर्क में रहेगी। अधिकारियों का सकारात्मक रवैया रहा है। उन लोगों ने गंभीरता से पूरी बात सुनी है। कानूनगो और पटवारी समेत तीन कर्मियों का तुरंत प्रभाव से तबादला करने का आश्वासन दिया गया है।
जेपी शेखपुरा के मामले में धमकी देने वाले लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएंगे। ग्रामीणों को आश्वासन देने पहुंचे एसडीएम मुकुल कुमार और तहसीलदार हरिओम अत्री ने कहा कि उन लोगों की जमीन कम होने का मामला सबसे महत्वपूर्ण है। इस पर तमाम कानूनी प्रक्रिया के हिसाब से काम किया जाएगा। उधर, 90 एकड़ भूमि में खड़ी धान की फसल को जिसने बोया था, वही काटेगा।
उसके बाद फैसला होने तक यह जमीन पूरी तरह खाली रखी जाएगी। इसके अलावा सीडी व धमकी देने वाले मामले में कार्रवाई की जाएगी। इसके अतिरिक्त दर्ज किए गए मामलों को रद्द कराने के लिए कानूनी प्रक्रिया के तहत लिया जाएगा। उधर, दूसरे पक्ष के लोगों में शामिल अमृतपुर कलां के पूर्व सरपंच बलजीत सिंह, सरपंच कर्मसिंह, नंबरदार सपट्टर सिंह, नंबरदार मोहर सिंह, पूर्व सरपंच जिले सिंह, नरेंद्र सिंह राणा, पूर्व सरपंच रत्न सिंह, केहर सिंह समेत सैकड़ों लोग अपना पक्ष रखने पहुंचे थे। इन लोगों ने अनुसार वे लोग भी अपने मामले में आयुक्त और अन्य अधिकारियों से मिले हैं।
दोनों ग्रुपों के प्रतिनिधिमंडल अलग-अलग मिले हैं। वर्ष 1987 में हाईकोर्ट के निर्देश पर चकबंदी की गई थी। दूसरे पक्ष के लोग उन लोगों को भूमाफिया बता रहे हैं लेकिन दूसरे पक्ष के लोग तहसीलदार कार्यालय से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जा चुके हैं।