मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। इसे एकबार फिर साबित किया है गांव सग्गा की बेटी मुकुल राणा-20 ने। आर्थिक तंगी के कारण मुकुल जब ट्रैक साइकिल नहीं खरीद सकी तो उसने साइकिल उधार लेकर हैदराबाद में आयोजित ट्रैक रेस प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया और कांस्य पदक जीता।
करनाल के सग्गा गांव की रहने वाली मुकुल राणा ने 16 साल की उम्र से नडाना के अर्जुन सिंह मेमोरियल स्कूल से साइक्लिंग की शुरुआत की। फिर 2017 से मुकुल ने कर्ण स्टेडियम में साइक्लिंग का अभ्यास किया। मुकुल ने बताया कि हैदराबाद के ओसमानिया स्टेडियम में 27 से 31 मार्च तक नेशनल ट्रैक रेस का आयोजन किया गया। इसमें देशभर के तीन हजार से अधिक खिलाड़ियों ने भाग लिया था। वहीं हरियाणा के 48 खिलाड़ी शामिल थे। सीनियर कैटेगरी में मुकुल राणा ने 28 और 30 मार्च को ट्रैक रेस में प्रर्दशन कर कांस्य पदक जीता। मुकुल के अनुसार पहली बार उसे नेशनल ट्रैक रेस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का अवसर मिला था। इसके लिए उसके पास ट्रैक साइकिल भी नहीं थी। न ही उसने कभी ट्रैक साइकिल चलाई थी। साइकिल महंगी होने के चलते खरीदना संभव भी नहीं था। ऐसे में पहले दोस्त से साइकिल उधार लेकर ट्रायल में चयनित हुई और फिर प्रतियोगिता में हिस्सा किया। इससे पहले तीन साल तक अपने स्कूल के स्टेडियम में केवल रोड साइकिल पर ही उसने अभ्यास किया था। विदित हो कि मुुकुल के पिता पेट्रोल पंप पर काम करते हैं।
अब निशुल्क ट्रेनिंग की खुली राह
मुकुल के बेहतरीन प्रदर्शन को देखते हुए पटियाला के स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया में उसका चयन किया गया है। यहां मुकुल को आगे साइक्लिंग की निशुल्क ट्रेनिंग दी जाएगी। रेस जीतकर वापस करनाल पहुंचने पर शनिवार को लोगों ने धूमधाम से मुकुल का स्वागत किया।
साइक्लिंग वेलोड्रम पर ही ट्रैक रेस का अभ्यास होता है। हरियाणा में कहीं भी वेलोड्रम नहीं है। मुकुल ने केवल रोड साइक्लिंग का ही अभ्यास किया है, लेकिन फिर भी मौका आने पर बिना किसी तैयारी के पहली बार में ही ट्रैक रेस में भाग लेकर अपने आप को साबित कर दिया। कर्ण स्टेडियम में करनाल सेंटर से साइक्लिंग के कुल 30 खिलाड़ी हैं जिनमें से 18 लड़कियां हैं और 12 लड़के शामिल हैं।
- ओमकार, साइक्लिंग कोच, कर्ण स्टेडियम