सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के लिए अच्छी खबर है। अब किताबों के अभाव में उनकी पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। समग्र शिक्षा अभियान के तहत सरकारी स्कूल के कक्षा पहली से आठवीं तक के बच्चों को शिक्षा विभाग की ओर से नई पुस्तकें उपलब्ध करवाई जाएंगी। इसी कड़ी में कक्षा तीसरी, चौथी व छठी को छोड़कर अन्य कक्षाओं की पुस्तकें स्कूलों में आ चुकी हैं। जिन्हें स्कूल मुखिया सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर बारी-बारी से बच्चों को बुलाकर या फिर उनके घर-घर पुस्तकें उपलब्ध करवाएंगे। शेष कक्षाओं की पुस्तकें भी शीघ्र विभाग बच्चों तक पहुंचाएगा।
जिले के सरकारी स्कूलों में कक्षा आठवीं तक करीब 90 हजार विद्यार्थी पढ़ते हैं। इन सभी को विभाग की ओर से किताबें उपलब्ध कराई जाएंगी। इस बार शिक्षा सत्र का शुभारंभ कोरोना महामारी से बचाव को लेकर देशभर में लागू किए गए लॉकडाउन में हुआ। पहला लॉकडाउन तो कोरोना को हराने की सोचते-सोचते बीत गया। इसके बाद लगा कि अभी कोरोना का कहर इतनी जल्दी खत्म नहीं हो सकता। बच्चों की पढ़ाई भी आवश्यक है। इसके बाद सरकार व शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों की तरह बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाने का निर्णय लिया गया। बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई में जब पुस्तकों की कमी खली तो बच्चों में पुस्तकों की अदला-बदली भी शुरू की गई। सीनियर बच्चों की पुस्तकें जूनियर को देने का क्रम चला। इससे कुछ बच्चों को लाभ मिला, परंतु फिर भी अधिकांश बच्चों के पास पुस्तकें नहीं होने के कारण पढ़ाई में बाधा उत्पन्न हो रही थी। ऐसे में अब दाखिला लेने वाले बच्चों की पुस्तकों की व्यवस्था विभाग की ओर से की जाएगी। क्योंकि लॉकडाउन के चलते बहुत से नए बच्चों ने अभी दाखिला नहीं लिया है। अब दाखिला प्रक्रिया चल रही है।
कक्षा तीसरी, चौथी व छठी को छोड़कर अन्य कक्षाओं की पुस्तके जिले के सभी स्कूलों में छात्र संख्या के हिसाब से भेज दी गई हैं। स्कूल मुखिया किताबों के वितरण का कार्य करवाएंगे। किताबें मिलने से शिक्षक अच्छी प्रकार से पढ़ा सकेगा। वहीं बच्चे भी अच्छी प्रकार से सिलेबस को समझ और कवर कर सकेंगे। इन तीनों कक्षाओं की पुस्तकें भी जल्द आ जाएंगी। -सपना जैन, डीपीसी, समग्र शिक्षा अभियान करनाल।