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कोरोना के मरीजों के लिए फांस बना ब्लैक फंगस

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कोरोना के मरीजों के लिए ब्लैक फंगस फांस बन गया है। मुलाना मेडिकल अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार अब तक ब्लैक फंगस से 5 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से दो सहारनपुर और 3 अंबाला के थे। इतना ही नहीं मुलाना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में अब तक 25 केस की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें से 15 के आपरेशन हो चुके हैं। इनमें से आठ लोगों को आंखें गंवानी पड़ी है, हालांकि जिला स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में अभी तक ब्लैक फंगस से एक भी मौत नहीं हुई है।
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मुलाना ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. मुनीष गुप्ता ने बताया कि ब्लैक फंगस से जान गंवाने वालों में उत्तरप्रदेश सहारनपुर के जयपाल और उमाकांत के अलावा अंबाला की कर्मावली, हरीश और सुरमुखी शामिल हैं। इस समय रजनी का ऑपरेशन होना है जोकि अंबाला की रहने वाली है। ईको की रिपोर्ट के बाद ही उसका ऑपरेशन तय होगा, जबकि पंचकूला के सुरेंद्र कुमार के दिमाग तक ब्लैक फंगस चला गया है और वह वेंटिलेटर पर हैं, इसीलिए अभी उसका ऑपरेशन लंबित है।
ब्लैक फंगस के कल्चर टेस्ट हो रहे पर उपचार नहीं
जिला नागरिक अस्पताल प्रदेश का पहला ऐसा नागरिक अस्पताल है जहां ब्लैक फंगस के कल्चर टेस्ट हो रहे हैं। इसके बावजूद जिला केवल रेफरल सेंटर बन गया है। यह हाल तब है जब यहां दो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल जिनमें मुलाना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल और आदर्श मेडिकल कॉलेज में तमाम सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां भी अंबाला के मरीजों का इलाज हो सकता है लेकिन इन्हें पैनल में शामिल नहीं किया। ऐसे में अंबाला के मरीजों को करनाल भेजना पड़ रहा है।
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आधारकार्ड के बिना इलाज मुश्किल
जिले में बहुत से ऐसे लोग हैं जिनके पास आधार कार्ड अंबाला का नहीं है। ऐसे लोगों को इलाज के लिए धक्के खाने पड़ रहे हैं। उन्हें करनाल में भी भर्ती नहीं किया जाता। एक महिला मरीज को इसी तरह धक्के खाने पड़े थे। अंत में मरीज बलजीत कौर की बेटी ने डॉक्टरों के हाथ-पैर जोड़े तब जाकर उसे चंडीगढ़ रेफर किया गया।
कोरोना और शुगर बना ब्लैक फंगस का कारण
मुलाना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के विशेषज्ञ डॉ. मुनीष गुप्ता ने बताया कि अभी तक यहां पर जितने भी केस आए हैं सभी की कोरोना हिस्ट्री थी। सभी को अनियंत्रित शुगर की समस्या थी। सभी 25 केस में से एक भी केस ऐसा नहीं था, जिसे ऑक्सीजन थेरैपी के कारण यह दिक्कत आई हो। डॉ. मुनीष के अनुसार इनमें से करीब 10 मरीज तो ऐसे थे जिन्हें कोरोना के दौरान ऑक्सीजन ही नहीं लगी थी।
केवल सरकारी सप्लाई पर निर्भरता, मार्केट में नहीं हैं टीके
ब्लैक फंगस से मरीजों की जान बचाने में सबसे कारगर लाइफोलाइज्ड इंजेक्शन जिसकी कीमत करीब 7 हजार है और एम्फोटेरिसिन-बी है इसकी कीमत 6 हजार है। सरकारी अस्पताल से ही इन्हें दूसरे अस्पतालों को जारी किया जाता है। ब्लैक फंगस के एक मरीज को 40 टीके तक लगाने पड़ते हैं। इसके अलावा 300 रुपये की कीमत वाला एम्फोटेरिसिन-डी ऑक्सीकोलेज इंजेक्शन भी लगता है। लेकिन यह कम फंगस में ही काम करता है। इसी तरह पासकोनाजोल टेबलेट करीब 600 रुपये प्रति गोली और टीका करीब 8500 रुपये का है। इसे भी ड्रग कंट्रोल जनरल ऑफ इंडिया की मंजूरी मिली है। मुलाना को करीब 96 टीके सरकारी सप्लाई में दिए जा चुके हैं।
जिले में अभी तक 17 केस की पुष्टि हुई है, जो अंबाला से बाहर के मरीज हैं उन्हें अब हमने पीजीआई भेजने का निर्णय लिया है। हमने पहले मुलाना को ही ब्लैक फंगस का केयर सेंटर बनाया था, लेकिन अब सरकार ने कल्पना चावला करनाल में केवल अंबाला के मरीजों को भेजने के आदेश दिए हैं। वहीं पर मरीजों को तमाम सुविधाएं निशुल्क मुहैया करवाई जाएंगी।
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-डॉ. कुलदीप सिंह, सिविल सर्जन अंबाला।
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