महापंचायत से लौटता वाहनों का काफिला।
- फोटो : अमर उजाला
किसानों से आगे बढ़कर टिकैत ने कर्मचारियों को भी जोड़ने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि पहले सरकार ने कर्मचारियों से पेंशन छीनी है। इस पर भी हम अभियान चलाएंगे। वोट मांगने आने वाले नेताओं से पूछा जाएगा कि क्या वह पेंशन छोड़ने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि नए कृषि कानूनों से भूख के आधार पर अनाज की कीमत तय होगी।
हम गरीब की रोटी तिजोरी में नहीं जाने देंगे। बड़ी कंपनियां आने से पेट्रोल की तरह रोटी की कीमत बढ़ेगी। उन्होंने आह्वान किया कि गठबंधन पर विश्वास बनाए रखें और एक भी कड़ी कमजोर न होने दें। संगठन और गठबंधन पर ध्यान दें। पूरे देश का किसान इस मोर्चा के पीछे खड़ा है।
संयुक्त किसान मोर्चा के नेता युद्धवीर सिंह ने कहा कि कृषि कानून से किसान खत्म होंगे और नए किसान पैदा होंगे। खुली बिक्री से किसान अपनी उपज दूसरे राज्यों तक कैसे लेकर जाएगा। कांट्रैक्ट फार्मिंग की बात करें तो उत्पाद की गुणवत्ता कुदरत के हाथ में है। 81 दिन आंदोलन के बाद भी सरकार किसानों की अनदेखी कर रही है।
मंच पर मौजूद राकेश टिकैत, गुरनाम सिंह चढूनी और बलवीर सिंह राजेवाल व अन्य।
- फोटो : अमर उजाला
डॉ. दर्शनपाल ने कहा कि देश के किसानों का भविष्य नेताओं के हाथ में है। वहीं किसान विरोधी सरकार को सत्ता में रहने का हक नहीं है। आने वाले समय में छोटूराम की स्मृति में बड़ा आयोजन किया जाएगा। 18 फरवरी को ट्रेनों का चक्का जाम किया जाएगा।
बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि हर दिन दो-तीन किसान शहीद हो रहे हैं। 200 से ज्यादा किसानों की मौत हो चुकी है। 11 बार सरकार के साथ बैठकें हो चुकी हैं। सरकार को बिंदुवार इन कानूनों के बारे में कमियां बताई हैं। इसके बावजूद हमें आंदोलनजीवी कहा जा रहा है।
गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि हम आजीविका बचाने के लिए लड़ रहे हैं। खेती कार्पोरेट घरानों को जाने वाली है। जिस पर 65 प्रतिशत किसान-मजदूर जीवन यापन करते हैं।
राकेश टिकैत के साथ कैंडल मार्च निकाल दी पुलवामा के शहीदों को श्रद्धांजलि
पुलवामा हमले में 14 फरवरी 2019 को शहीद हुए 40 जवानों को श्रद्धांजलि देने के लिए रविवार की शाम पानीपत टोल प्लाजा और डाहर टोल प्लाजा पर किसानों ने कैंडल मार्च निकाला, जिसमें सैकड़ों किसानों के साथ ही राकेश टिकैत भी शामिल हुए। कैंडल मार्च निकाल शहीदों को नमन किया।