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नटी बिनोदनी ने जीता सबका दिल

Sat, 16 Nov 2013 12:22 AM IST
कुरुक्षेत्र
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कुरुक्षेत्र के मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर में पंजाब संगीत नाटक अकादमी, चंडीगढ़ के सहयोग से आयोजित चार दिवसीय पंजाब नाट्य उत्सव में पहले दिन सबदीश का लिखा व अनीता सबदीश के निर्देशन में सुचेतक रंग मंडल, मोहाली के कलाकारों ने बंगाल में रंगमंच की जन्मदाता बिनोदनी के जीवन पर आधारित नाटक नटी बिनोदनी का मंचन किया। कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत पंजाब आर्ट काउंसिल की चेयरपर्सन बीबी हरजिंद्र कौर ने दीप प्रज्वलित कर की।
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नाट्य उत्सव के पहले दिन नाटक की कहानी बंगाल में रंगमंच को जीवंत रखने वाली बिनोदनी के जीवन को प्रस्तुत कर रही थी। नाटक में दिखाया गया कि बिनोदनी एक वेश्या की पुत्री है तथा अत्यंत सुंदर भी है। उसे बचपन से ही रंगमंच से लगाव है, किंतु उसे देखने वाले उसकी अदायगी की बारीकियों की जगह उसकी सुंदरता पर ज्यादा फिदा नजर आते हैं।

नटी बिनोदनी को जीवन भर इस बात का मलाल भी रहता है कि यह पुरुष प्रधान समाज हमेशा नारी को मात्र उपभोग की वस्तु ही समझता है।

बिनोदनी नेशनल थियेटर के लिए काम करना शुरू कर देती है। बंगाल के गिरीश बाबू के साथ मिलकर बिनोदनी रंगमंच के माध्यम से धार्मिक किरदार करती है और अपना नाम पूरे बंगाल में प्रसिद्ध कर लेती है।
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बिनोदनी एक ठाकुर से प्रेम कर बैठती है। बिनोदनी के रूप पर मोहित ठाकुर साहब को कतई पसंद नहीं कि बिनोदनी लोगों के सामने नाच-गाना या थियेटर करें। किंतु बिनोदनी ठाकुर साहब को पहले ही स्पष्ट कर देती है कि अगर कभी उसे थियेटर या ठाकुर साहब में से किसी एक को चुनना पड़ा तो थियेटर उसकी पहली पसंद रहेगी।

ठाकुर बिनोदनी की जिद्द के सामने घुटने टेक देता है और एक दिन गंगा किनारे चांदनीर रात में बिनोदनी के साथ जीवन भर अपना प्रेम निभाने की कसमें खाता है। किंतु जब कुछ दिन बाद बिनोदनी की मां उसे बताती है कि ठाकुर साहब ने शादी कर ली है तो बिनोदनी का दिल टूट जाता है। वह इन हालातों में भी थियेटर करना नहीं छोड़ती।

ऐसे में एक मारवाड़ी सेठ बिनोदनी के जीवन में जबरन घुस आता है। मां के दबाव में बिनोदनी सेठ से बातचीत करती है। सेठ बिनोदनी को कहता है कि वह उसके लिए एक रंगमंच विशेष तौर पर तैयार करवाएगा और उस थियेटर का नाम होगा बिनोदनी थियेटर। थियेटर का नाम बिनोदनी रखने पर रंगमंच के अन्य कलाकार सहमत नहीं होते और वे लोग जैसे तैसे बिनोदनी को थियेटर का नाम स्टार थियेटर रखने पर राजी कर लेते हैं।

हालांकि बिनोदनी सहमत हो जाती है किंतु उसे यह जानकार काफी दुख होता है कि रंगमंच के उसके अपने संगी साथी भी उसे उसके जन्म समाज से अलग नहीं कर पाए। गाहे बगाहे वे लोग भी उसे वेश्या की बेटी ही समझते रहे। इससे आहत बिनोदिनी और एक दिन रंगमंच को छोड़कर कहीं चली जाती है।

नाटक में बिनोदनी का किरदार अनीता सबदीश ने निभाया। इसके अतिरिक्त हरमन पाल सिंह, दिलखुश, तेजभान गांधी, गुरप्रीत कौर, दिलबाग सिंह, अंजली, आशी, करण गुलजार, हरपिंदर सिंह, गोल्डी लांबा, सन्नी गिल, विनोद कुमार तथा हार्दिक ने नाटक की सफल प्रस्तुति में सहयोग दिया।

नाटक के अंत में मुख्यातिथि बीबी हरजिंद्र कौर ने नाटक निदेशिका अनीता सबदीश को एक पुष्पगुच्छ व स्मृतिचिह्न तथा सभी कलाकारों को पुष्प देकर सम्मानित किया। मैक उपाध्यक्ष चंद्र शर्मा ने पंजाब आर्ट काउंसिल की चेयरपर्सन बीबी हरजिंद्र कौर, महासचिव प्रो. निर्मल दत्त व पंजाब संगीत नाटक अकादमी के सचिव सुदेश शर्मा को भी एक-एक स्मृति चिह्न भेंट कर उनका आभार प्रकट किया।
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कुरुक्षेत्र, पंजाब थियेटर उत्सव के तीसरे दिन आज युद्ध अते बुद्ध नाटक का मंचन होगा। तथा आखिरी दिन एक सुपने दा राजनीति कत्ल नाटक पेश किया जाएगा।
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