संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। आज भाद्रपद अमावस्या के अवसर पर पितरों का श्राद्ध, तर्पण और दान किया जाएगा। श्री श्याम बाला जी ज्योतिष केंद्र के संचालक पंडित विनोद शास्त्री के अनुसार भाद्रपद अमावस्या को कुशग्रहणी अमावस्या भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन धार्मिक कार्यो के लिए कुशा को तोड़कर रखना अत्यंत शुभ माना जाता है।
माना जाता है कि यदि ये अमावस्या सोमवार को आए तो उस दिन जमा की गई कुशा बारह वर्षों तक उपयोग में लाई जा सकती है। यह तिथि स्नान, दान और तर्पण के लिए अत्यंत मंगलकारी और फलदायी होती है। भाद्रपद मास की अमावस्या को कुशग्रहणी अमावस्या या पिठोरी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। भाद्रपद अमावस्या 23 अगस्त, शनिवार को पड़ रही है। शनिवार को आने के कारण इसे शनिश्चरी अमावस्या भी कहा जाएगा। इस दिन पितरों के साथ-साथ शनिदेव की पूजा करने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है और शनि दोष से मुक्ति मिलती है। भाद्रपद अमावस्या के दिन स्नान और दान का शुभ समय प्रात चार बजकर 26 मिनट से लेकर पांच बजकर दस मिनट तक रहेगा।
इस दिन प्रातः काल पवित्र नदी, सरोवर में स्नान करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद भगवान शिव और श्रीहरि विष्णु की पूजा करें। पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान और जरूरतमंदों को भोजन कराना पुण्यदायी माना जाता है।