ब्लाक स्तर पर प्रस्तावित खेल स्टेडियम का निर्माण अधर में लटकने से खिलाड़ियों के अरमान धरे के धरे रह गए हैं। स्टेडियम की मंजूरी के डेढ़ दशक बीतने पर भी ग्रामीणों को स्टेडियम नसीब नहीं हुआ है।
लबोलुआब यह है कि करीब सवा करोड़ की लागत से बनकर तैयार होने वाले स्टेडियम की फिलहाल आधारशिला तक नहीं रखी जा सकी है। निर्माण कार्य पूरा न होने से प्रस्तावित जमीन पर खिलाड़ी खेलने की बजाय ग्रामीण मृत मवेशियों को दबा रहे हैं। ग्रामीण राजबीर सिंह, दरियाव सिंह और जसबीर सिंह सहित अन्य का कहना है कि बल्ला की आबादी एवं खिलाड़ियों के प्रदेश स्तर पर शानदार प्रदर्शन को देखते हुए प्रदेश सरकार की नीति अनुसार तत्कालीन सरपंच ओमप्रकाश मान ने करीब पांच लाख रुपये सन 1999 में सरकारी कोष में जमा करवाए थे।
सरकार की ओर से स्टेडियम का निर्माण करवाने के लिए बाकायदा 1.20 करोड़ रुपये की राशि भी स्वीकृत कर दी। पंचायत की देखरेख में पंचायती विभाग की ओर से कई साल पहले इसकी चारदीवारी का काम शुरू कर दिया गया लेकिन दो साइड की दीवार पर करीब 34 लाख खर्च करने के बाद इसका निर्माण बंद कर दिया गया। करीब तीन साल से प्रस्तावित जमीन पर दो दीवार को बनाने का काम ठप पड़ा है। इसके लिए ग्रामीणों ने कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात की है लेकिन कोई समाधान नही हुआ। वहीं बल्ला के कई खिलाड़ी नेशनल लेवल के खेलों में अपना लोहा मनवा चुके हैं।
ग्रामीणों को उम्मीद बंधी थी कि गांव में ही खेल संबंधी बेहतर सुविधाएं मिलने से उनकी प्रतिभा में और निखार आएगा लेकिन स्टेडियम का निर्माण ठप होने से उनके मंसूबों पर पानी फिर गया है। स्टेडियम की जमीन से पानी की निकासी न होने के कारण मामूली बरसात में ही पानी लबालब भर जाता है एवं समुद्र शौक नामक खरपतवार ने अपना जमावड़ा बनाया हुआ है। आलम यह है कि ग्रामीण अपने मृत मवेशियों को इस जमीन में गड्डा खोदकर दबा रहे हैं। गांव के बीच में स्टेडियम होने से बीमारी फैलने की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से अविलंब स्टेडियम का निर्माण कार्य पूरा करवाकर इसे चालू करने की मांग की है। वहीं सरपंच दिलावर सिंह मान का कहना है कि खेल स्टेडियम के निर्माण के लिए संबंधित विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया जा चुका है, उम्मीद है कि ठप पड़ा कार्य दोबारा से शुरू होगा।