यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के आह्वान पर जिले में सार्वजनिक क्षेत्रों की बैंक हड़ताल सफल रही। मंगलवार को हड़ताल के कारण करीब 600 से 700 करोड़ रुपये का लेन-देन प्रभावित हुआ। पैसे के लिए ज्यादा परेशानी व्यापारियों व उद्योगपतियों को उठानी पड़ी।
वहीं, रोजमर्रा के कार्यों के लिए लोग एटीएम के बाहर लाइनों में लगे रहे। हालांकि, शाम तक एटीएम भी जवाब दे गए। कर्मचारी नेताओं ने चेतावनी दी कि उनकी मांग पूरी नहीं की गई तो तल्ख आंदोलन की ओर कदम आगे बढ़ाए जा सकते हैं। मंगलवार सुबह सेक्टर-12 में पंजाब नेशनल बैंक के सर्कल आफिस के बाहर तीन जिलों के बैंक कर्मचारी व अधिकारी एकत्र हुए और उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। सुबह से ही सभी बैंकों पर ताले लटके नजर आए। कर्मचारी नेताओं का दावा है केि हड़ताल पूरी तरह से सफल रही। इस अवसर पर ललित अरोड़ा, सुमेर सिंह, आरके वाही, आरके इस पूजानी, एसके ललित, जितेंद्र, आरके अठवाल, सुधीर सोनी, एमपी राठी औरे एनके सिक्का मौजूद रहे।
एलबीएम राजेंद्र मल्होत्रा ने बताया कि हड़ताल के चलते जिले में लगभग 600 से 700 करोड़ का लेनदेन प्रभावित हुआ है, बुधवार को स्थिति सामान्य हो जाएगी।नोटबंदी के दौरान कर्मचारियों एवं अधिकारियों द्वारा बैंक समय के बाद किए गए कार्य के उचित भुगतान के प्रतिपूर्ति की जाए। ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 में ग्रेच्युटी सीमा राशि को समाप्त कर सेवा निवृत्ति पर ग्रेच्युटी व अवकाश नगदीकरण की राशि को पूर्णत: आयकर से मुक्त किया जाए।
सभी बैंकों में कामगार, अधिकारी निदेशकों की नियुक्ति अविलंब की जाए। बैंक कर्मियों के आगामी वेतन पुनरीक्षण की प्रक्रिया की शुरूआत शीघ्र की जाए। पेंशन संबंधी मुद्दे-पूर्व सेवानिवृत्त सहित सभी के लिए पेंशन योजना में आरबीआई, केंद्र सरकार की तरफ से सुधार किए जाएं, एनसीपी के स्थान पर बैंकों में पूर्व में जारी पेंशन योजना लागू की जाए। इसके साथ ही केंद्र सरकार की तर्ज पर सरकार द्वारा स्वीकृत अनुकंपा नियुक्ति योजना लागू की जाए। पांच दिवसीय बैंकिंग को शीघ्र शुरू करने आदि मांगें शामिल हैं।