पहली बार एनडीआरआई में पहुंचे योग गुरु बाबा रामदेव ने अपने डेढ़ घंटे के संबोधन में हंसी-ठहाकों के बीच डेयरी उद्योग की न केवल चुनौतियां गिनाई, बल्कि उनके समाधान भी बताए। डेयरी जगत के वरिष्ठ वैज्ञानिकों व स्टूडेंट्स को देसी तरीके से उत्पादन बढ़ाने व ब्रांडिंग के नुस्खे भी बताए। गांवों की तकनीक बताते हुए उन्होंने वैज्ञानिकों के रिसर्च को नहीं बख्शा। इसके साथ ही बीच-बीच में बाबा ने अपने तरकस से राजनीतिक तीर भी छोड़े। उन्होंने कांग्रेस और दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल पर भी जमकर चुटकी ली, हालांकि देश के पीएम मोदी की प्रशंसा भी की। अपने संबोधन के दौरान बाबा ने बिजनेस बढ़ाने के तरीके भी बताए और बीच-बीच में करीब 30 बार लोगों को जमकर हंसाया।
राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान में एनडीआरआई ग्रेजुएट्स एसोसिएशन के सहयोग से भारतीय दुग्ध एवं खाद्य क्षेत्र की भविष्य में आने वाली चुनौतियों एवं समाधान विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का बाबा रामदेव ने दीप प्रज्व्वलित करके शुभारंभ किया। वे 11. 50 पर बोलना शुरू हुए तो फिर रुके ही नहीं। वे दोपहर 1.25 मिनट तक धारा प्रवाह बोले। वे कभी संत की भूमिका में आए तो कभी स्वदेशी की। कभी बिजनेस प्रमोटर दिखे तो कभी टीचर।
ये हैं चुनौतियां और समाधान
बाबा ने कहा कि डेयरी उद्योग में आने वाले समय में कई तरह की चुनौतियां हैं। सबसे पहला जानवरों की भूख और कुपोषण है। इसके लिए जरूरी है कि जानवरों को भरपेट समय पर भोजन मिले, ताकि उसका समुचित विकास हो सके। अगर पशु स्वस्थ होगा तो दूध भी स्वच्छ होगा और उससे प्रोडक्ट भी अच्छे ही बनेंगे। दूसरी चुनौती मिलावट है। पशुओं के लिए बनाए जा रहे आहार में मिलावट की जाती है, जो गलत है। पशु आहार की जांच होनी चाहिए, इसके लिए वे पीएम को पत्र लिखेंगे, साथ ही पशु आहार में यूरिया डालने की अनुमति है, इसे बंद किया जाना चाहिए। इसके लिए पतंजलि पशु आहार लेकर आया है, जो बिलकुल शुद्ध है। तीसरी चुनौती बाबा ने पशुओं के लिए दवाएं कम होना बताया। उन्होंने कहा कि पशुओं पर तो शोध हो रहे हैं, लेकिन पशुओं की दवाइयों के लिए शोध नहीं हो रहा है, इस पर पतंजलि शोध करेगा, ताकि पशुओं को अच्छा इलाज मिल सके। हमारी कोशिश होगी कि इलाज आयुर्वेदिक होगा।
हम देंगे पैकेज
बाबा रामदेव ने कहा कि एनडीआरआई के स्टूडेंट्स को वे पतंजलि में प्लेसमेंट देंगे। इसके अलावा उन्होंने सीनियर वैज्ञानिकों का भी आह्वान किया कि वे भी पतंजलि में आ सकते हैं। इसके बदले उन्हें बड़े पैकेज दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि वे एनडीआरआई के साथ मिलकर डेयरी क्षेत्र में बड़ा काम करेंगे, इससे लोगों को रोजगार भी मिलेगा और लोगों को खाने के लिए अच्छी चीजें मिलेंगी। डेरी के क्षेत्र में एनडीआरआई ने जो काम किया है वह राष्ट्र के लिए गौरव है। उन्होंने कहा कि लगभग एक दशक से पतंजलि योगपीठ हरिद्घार द्वारा गौ संवर्धन एवं अनुसंधान का कार्य तीव्र गति से चल रहा है। कुछ वर्षो में जिसके अच्छे परिणाम राष्ट्र को मिलेंगे। करीब 50 से 60 किलो दूध देने वाली भारतीय नस्ल की गायें तैयार करना तथा देशी गाय को गौरव व समृद्घि का साधन बनाना हमारा ध्येय है। उन्होंने कहा कि एनडीआरआई के साथ मिलकर देशी नस्ल को सुधारने का काम किया जाएगा और जो 70 प्रतिशत ऐसी गाय हैं जिनकी नस्ल का पता नहीं है, उनको अपग्रेड किया जाएगा।
विदेशी कंपनियों को कराएंगे शीर्षासन
बाबा ने कहा कि आने वाले सालों में विदेशी कंपनियों को शीर्षासन कराएंगे और उनको वहीं भेज देंगे, जहां से वे आई हैं। हीरो-हीरोइन द्वारा विज्ञापन के माध्यम से प्रोडक्ट बेचने पर बाबा ने तंज कसते हुए अब हम बदल रहे हैं, आने वाले समय ऐसे प्रोडक्ट नहीं बिकेंगे। उन्होंने कहा कि अब संतों के नाम से प्रोडक्ट बिकेंगे, क्योंकि ये शुद्ध हैं और किसी भी प्रकार की मिलावट नहीं होती है। उन्होंने मंच से स्वदेशी चीजें खरीदने का नारा दिया।
गो व्रत, स्वदेशी व्रत और योग व्रत लें
सेमिनार में स्वामी रामदेव ने कहा कि अगर सभी गो व्रत, स्वदेशी व्रत और योग व्रत को अपना लें तो हिंदुस्तान फिर से ऋषियों का देश कहलाएगा। इसलिए सभी को चाहिए कि स्वदेशी को अपनाएं और देश की समृद्घि में योगदान दें। उन्होंने कहा कि वे किसान के बेटे हैं और किसानों का देश पर बहुत बड़ा ऋण है इसे उतारने के लिए डेरी के कारोबार को बढ़ाना होगा, ताकि किसानों के ऋण को उतारा जा सके। इस सेमिनार में डेयरी उद्योग से जुड़े करीब 400 प्रतिभागी दो दिन तक डेयरी सेक्टर की चुनौतियों पर मंथन करेंगे।
पत्रिका का विमोचन
दो दिन तक पशुपालन एवं डेयरी उद्योग पर गहन मंथन से सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे और भारतीय डेयरी उद्योग के लिए यह सेमिनार निश्चित रूप से मील का पत्थर साबित होगा। सम्मेलन में करीब 400 वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं। इस अवसर पर उन्होंने सेमिनार से संबंधित एक स्मारिका का भी विमोचन किया। इस अवसर पर संयुक्त निदेशक अनुसंधान डा. आरके मलिक, संयुक्त निदेशक शैक्षणिक डॉ. आरआरबी सिंह, डॉ. एचआर गुप्ता, डॉ. एके जैन, अशोक राव, रवि शंकर सहित संस्थान के अन्य वैज्ञानिकगण उपस्थित रहे।
गाय का दूध ही नहीं मूत्र भी उपयोगी
विद्यार्थियों द्वारा सड़कों पर घूमने वाली गायों के सवाल के जवाब में कहा कि गाय का दूध और मूत्र दोनों ही अमृत के सामन है। क्योंकि इसमें रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता अधिक होती है। गोमूत्र का अरक तैयार करके अनेक बीमारियों को दूर किया जा सकता है। बाबा रामदेव ने एनडीआरआई स्थित राष्ट्रीय दुग्ध गुणवत्ता एवं सुरक्षा लैब का दौरा किया। संस्थान द्वारा मिलावट को रोकने के लिए विकसित की गई टेक्नोलॉजी के बारे में जाना और प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि देश में मिलावट बहुत बड़ी समस्या है, इस पर अंकुश लगना चाहिए। जनता को जागरूक होने के साथ-साथ सरकार को भी कुछ कानून बनाने चाहिए।