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बाबा बंदा सिंह बहादुर की जीवन गाथा सुन भावविभोर हुए दर्शक

Sat, 21 May 2016 12:42 AM IST
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
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महान शहीद बाबा बंदा सिंह बहादुर - फोटो : अमर उजाला
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महान शहीद बाबा बंदा सिंह बहादुर के 300वें शहादत दिवस पर वीरवार देर रात्रि उनकी जीवनी पर आधारित प्रकाश, छायाचित्र एवं ध्वनि कार्यक्रम को देखकर दर्शक भावविभोर हो गए। लगभग ढाई घंटे बाबा बंदा सिंह बहादुर के जीवन के हर पहलू से दर्शकों को रूबरू करवाया गया। कार्यक्रम का आयोजन सूचना जनसंपर्क एवं सांस्कृतिक विभाग हरियाणा तथा बाबा बंदा सिंह बहादुर सिक्ख संप्रदाय, पंजाबी कला केंद्र एवं थियेटर आर्ट चंडीगढ़ द्वारा संयुक्त रूप से स्थानीय कृष्णा मंदिर के रूकमणी हॉल में किया गया। इस मौके पर मुख्य संसदीय सचिव बख्शीश सिंह विर्क ने बतौर मुख्यातिथि कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
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बचपन से ही थे तीरंदाज
इस दौरान मुख्य संसदीय सचिव ने बाबा बंदा सिंह बहादुर के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके बचपन का नाम लक्ष्मण दास था। बचपन से ही बाबा बंदा सिंह कुशल तीरंदाज थे। एक दिन हिरनी के शिकार की घटना ने उनके मन पर गहरा प्रभाव डाला और उन्होंने वैराग्य धारण कर लिया। वैराग्य धारण करने के बाद वह जानकी प्रसाद साधु के साथ लाहौर नगर के आश्रम में चले गए, जहां पर उनका नाम माधोदास रख दिया गया। इसी दौरान उन्होंने साधु रामदास को अपना गुरु बनाया और भारत भ्रमण पर चले गए। भारत भ्रमण के दौरान उन्होंने बहुत से तीर्थों की यात्रा की परंतु शाश्वत ज्ञान की प्राप्ति अभी तक नहीं हुई। तभी उनकी मुलाकात योगी औघड़नाथ से हुई। इस योगी के साथ माधोदास ने तंत्रमंत्र की विद्या में निपुणता प्राप्त की और उन्होंने गोदावरी नदी के तट पर नादेड़ नगर में अपना आश्रम बनाया। तंत्र मंत्र की विद्या में चूर होकर माधोदास अभिमानी हो गया और परोपकार का मार्ग भूल गया तथा आसपास के लोगों को भयभीत करने लगा।

यूं नाम पड़ा बंदा सिंह
सीपीएस ने बताया कि एक दिन गुरु गोविंद सिंह उधर से गुजरे तो स्थानीय लोगों ने बताया कि एक तंत्र-मंत्र से निपुण वैरागी साधु यहां पर रहता है। गुरु जी स्वयं माधोदास के आश्रम में पहुंचे और उनके पलंग पर बैठ गए। जब माधोदास आश्रम में पहुंचे तो उसने अपनी तंत्रमंत्र की विद्या से गुरु जी का पलंग पलटने की कोशिश की, जिसमें वह कामयाब नहीं हुआ। गुरु जी से साक्षात्कार के बाद माधोदास जान गया कि सच्चे गुरु यही है और वह उनके बंदे बन गए, तभी से उनका नाम बंदा सिंह पड़ा।
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पूरे प्रदेश में हो रहे आयोजन
सीपीएस ने कहा कि हरियाणा में युवा पीढ़ी को जागरूक करने और इतिहास से आत्मसात करवाने के लिए पहली बार बाबा बंदा सिंह बहादुर के 300वें शहीदी दिवस पर इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन पूरे प्रदेश में किया जा रहा है। इसके साथ-साथ 2 जून से 8 जून तक हरियाणा में त्रि-शताब्दी शहीदी यात्रा का आयोजन भी किया जाएगा, जिसे सरकार द्वारा अतिथि यात्रा घोषित किया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने बाबा बंदा सिंह बहादुर की शहीदी यात्रा को अतिथि यात्रा घोषित करके सिख समुदाय का मान बढ़ाया है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय के ओएसडी अमरेन्द्र सिंह,नगर निगम की मेयर रेनू बाला गुप्ता,बाल कल्याण परिषद की मानद सचिव संतोष अत्रेजा, बाबा सुखा सिंह, कार्यक्रम की नोडल अधिकारी वर्षा खांगवाल, एसडीएम अश्वनी मलिक, डीआईपीआरओ धर्मवीर सिंह, गुरविन्द्र सिंह, शिव शंकर पाहवा, ओमप्रकाश अत्रेजा,अशोक सुखीजा, नगर निगम के सीनियर डिप्टी मेयर कृष्ण गर्ग, मनोज ढिंगड़ा, राजेन्द्र खुराना, रविन्द्र सिंह, हरबंस चानना, राजेश खुराना, प्रवीन धवन, प्रवीन लाठर,भगवान दास अग्गी, राजीव अरडाना, ललित डाबरा, निर्मल बहल, अमर ठक्कर, संजय कुमार, मनमीत मेनी, दिवान सिंह, तेजबीर सिंह, बलजीत सिंह मुनक, गुरबख्शीश सिंह लाडी, रविन्द्र खुराना सहित अन्य गणमान्य मौजूद थे।

बेहतरीन प्रस्तुति ने मोहा मन
पंजाब कला केंद्र एवं थियेटर आर्ट चंडीगढ़ के कलाकारों ने प्रकाश, छायाचित्र एवं ध्वनि कार्यक्रम में बाबा बंदा सिंह बहादुर की जीवनी पर आधारित शो को बेहतरीन तरीके से प्रस्तुत किया। लगभग दो घंटे चले कार्यक्रम में हॉल में बैठे सभी दर्शक भावविभोर हो गए। कार्यक्रम में लाइट, साइट एंड सांउड के साथ प्रोजेक्टर द्वारा बाबा बंदा सिंह बहादुर की जीवनी पर आधारित फिल्म भी दिखाई गई।  थियेटर ग्रुप के कलाकार बलकार सिद्धु, उमेश नागपाल, पवन बग्गा, सोनिका भाटिया, बलजिन्द्र, बलकार लाम्बा, सन्नी गिल, मलकियत, मनप्रीत, मनदीप सिंह, रोहित डोगरा, हरदीप ने राजीव मेहता द्वारा निर्देशित बाबा बंदा सिंह बहादुर की जीवनी को बेहतरीन अदाकारी के साथ प्रस्तुत किया। कार्यक्रम को संजोने का कार्य एसके पुनिया ने बखूबी किया।
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