माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। भले ही केंद्र सरकार ने आयुर्वेद दिवस को 23 सितंबर एक नई तिथि दे दी हो लेकिन आयुर्वेदाचार्य इससे सहमत नहीं है। उनका कहना है कि सरकार को पौराणिक महत्व से छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए।
शहर के आयुर्वेदाचार्य एवं भारतीय चिकित्सा परिषद के मानद सदस्य डॉ.मनोज विरमानी का कहना है कि भारत सरकार ने आज सदियों पुरानी के धार्मिक परंपरा को बदल दिया है। समुद्र मंथन के दौरान जब भगवान धनवंतरि हाथ में अमृत लेकर निकले तभी से आयुर्वेद का जन्म माना जाता है, उन्होंने दुनिया को शल्य चिकित्सा से लेकर सभी तरह की चिकित्सा पद्धतियों का ज्ञान दिया। पूरा देश दिवाली से दो दिन पहले उनकी जयंती पर ही आयुर्वेद दिवस मनाता आ रहा है। सरकार भले ही तिथि तय करने के पीछे खगोलीय आधार बता रही है लेकिन ये सही नहीं माना जा सकता है। ये ऋतु आधारित है और ऋषि मुनियों द्वारा स्थापित परंपरा है, जो एकदम सटीक है, उसे बदला नहीं जाना चाहिए। हम धनवंतरि जयंती को ही आयुर्वेद दिवस मनाएंगे।