- 11 हजार करोड़ वैट पर इतना ही लगा जुर्माना और ब्याज, अब ब्याज माफी की लगा रहे गुहार
गगन तलवार
करनाल। जीएसटी लाने के बाद केंद्र सरकार की ओर से वैट को खत्म कर दिया गया था, लेकिन वैट के समय का टैक्स अभी तक प्रदेश के व्यापारियों पर बकाया है। करीब 11 हजार करोड़ रुपये के वैट पर छह वर्षों में ब्याज और जुर्माना लगने के बाद 22 हजार करोड़ रुपये की देनदारी बन चुकी है। इनमें से करनाल के व्यापारियों पर कराधान विभाग का करीब सात हजार करोड़ रुपये बकाया चल रहा है।
अब विभाग व्यापारियों पर वैट की बकाया राशि जमा कराने के लिए दबाव बढ़ा रहा है जबकि व्यापारी सरकार से राहत की आस लगाए हुए हैं। हरियाणा कर बार एसोसिएशन के माध्यम से मुख्यमंत्री, कराधान मंत्री, एसीएस और आयुक्त को मांगपत्र भेजा गया है। जिसमें व्यापारियों के कर पर ब्याज और जुर्माने की एकमुश्त योजना लाने की मांग उठाई गई है। ताकि एकमुश्त भुगतान में उन्हें ब्याज और जुर्माने में राहत मिले और वे कर का भुगतान करते हुए लंबित मामलों से निजात पा सकें। विदित हो कि जुलाई 2017 में केंद्र सरकार ने वैट को खत्म कर दिया था। व्यापारियों एवं अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2016-17 तक के केसों में इनपुट मैच न होने के कारण और वैट के फॉर्म जमा न करवाने के कारण कर पर ब्याज और जुर्माना अभी तक भी बकाया है। ब्यूरो
अतिरिक्त कर को रिफंड करे सरकार
व्यापारियों ने जहां कर पर ब्याज और जुर्माना की एकमुश्त योजना लाने की मांग की है, वहीं सरकार की तरफ उनके कर के रूप में जो पैसे अधिक गए हैं, उसको भी रिफंड करने की मांग की है। व्यापारियों का कहना है कि इसके लिए उच्च अधिकारियों के पास अपील की हुई है, यह भी ज्यादा केस होने के कारण लंबित हैं। उनका कहना है कि इन अपीलों और दूसरे व्यापारियों से फार्म लेने के लिए उन्हें चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
तो देना पड़ता है ज्यादा टैक्स
व्यापारी को माल दो प्रतिशत टैक्स पर बेचने के लिए दूसरे व्यापारी से सी फॉर्म लेकर कराधान विभाग को जमा करना होता है। यह फार्म विभाग की तरफ से दो पार्टियों के लेन-देन के आधार पर जारी किया जाता है। इसके अनुसार ही व्यापारी कर जमा करवाता है। जो सी-फार्म देते हैं उस माल पर दो प्रतिशत कर लगता है और जो सी-फार्म नहीं देते उस माल पर 13.125 प्रतिशत टैक्स देना होता है।
केस स्टडी : कोरोना में बंद हुई फर्में
एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष एडवोकेट संजय मदान के अनुसार, कोरोना काल में कई फर्में बंद हुईं इसलिए इनपुट मैच न होने के कारण मामले लंबित हैं। उन्होंने गुरुग्राम के एक व्यापारी का उदाहरण देते हुए बताया कि मालिक की कोरोना में मृत्यु होने के कारण फर्म बंद हो चुकी है। विभाग के नियम के अनुसार फर्म से लिखवाकर देने पर वे लंबित कर वाली फर्म के इनपुट को मानेंगे, लेकिन दुविधा यह है कि फर्म बंद होने के बाद लिखकर कौन देगा। इस तरह के कई मामले हैं, जिनमें व्यापारियों को दिक्कत आ रही है, क्योंकि कोरोना के बाद कई फर्में बिकी भी हैं तो कुछ के संचालक भी बदले हैं।
मामले निपटाने के लिए एसोसिएशन सक्रिय
हरियाणा प्रदेश कर बार एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष संजय मदान का कहना है कि प्रदेश के करीब 22 हजार करोड़ रुपये के वैट के लंबित मामलों को निपटाने के लिए मुख्यमंत्री, कराधान मंत्री और एसीएस को पत्र लिखा गया। ताकि जुलाई 2017 में खत्म हुए वैट में व्यापारियों को राहत मिले। इसके लिए हम सक्रिय हैं।
जिन व्यापारियों के वैट के समय की राशि लंबित है, उनको जमा करवाने के लिए कहा गया है। नियमों के तहत मामलों की सुनवाई करते हुए इसका हल करने का भी प्रयास कर रहे हैं।
- सुनीला सिंह, डीईटीसी (सेल्स)