माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती की पूर्व संध्या पर हरियाणा के 250 गांवों को अटल पुस्तकालयों का ऐतिहासिक उपहार मिला है। इनका निर्माण लगभग 34 करोड़ की लागत से पूरा हुआ है। इनमें करनाल, अंबाला, यमुनानगर, हिसार, झज्जर, रोहतक, भिवानी, जींद और फतेहाबाद जिलों के पंद्रह-पंद्रह पुस्तकालय शामिल हैं। योजना के तहत स्वीकृत अटल पुस्तकालयों में सर्वाधिक 121 पुस्तकालय अकेले करनाल जिले में हैं। जिनमें से 15 शुरू हो चुके हैं। अब इन्हें संचालन के लिए ग्राम पंचायतों को सौंप दिया गया है।
इन पुस्तकालयों का लोकार्पण केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार शाम को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की उपस्थिति में पंचकूला से किया। इन अटल पुस्तकालयों के संचालन के लिए सरपंच की अध्यक्षता में एक प्रबंधन समिति गठित करने का प्रावधान किया गया है। इस समिति में गांव में निवास कर रहे सेवानिवृत्त शिक्षाविदों तथा स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों को शामिल करने का भी प्रस्ताव है, ताकि पुस्तकालय केवल भवन न रहकर गांव के ज्ञान, संवाद और संस्कार के केंद्र बन सकें। ये अटल पुस्तकालय ग्रामीण युवाओं को अध्ययन, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और डिजिटल ज्ञान से जोड़ने की दिशा में एक सशक्त माध्यम सिद्ध होंगे और ग्राम स्वराज की परिकल्पना को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
जिले में इन 15 गांवों में मिले पुस्तकालय-
असंध के गांव रेहड़ा, अरढाना, इंद्री के गांधी नगर, मूनक के मानपुरा, बलला, मूनक, चिडाओ के लिए खेड़ी नरू, करनाल के संगरोहा, भूसली, इंद्री के उम्रपुर, जनेसरो, गुमटो, करनाल के रंभा, कमालपुर और नीलोखेड़ी के सुल्तानपुर को पुस्तकालय की सौगात मिली है। इन सभी पर करीब 1.63 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इस योजना के तहत जिले के राहड़ा गांव में स्थित अटल पुस्तकालय के लोकार्पण हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने किया।
अनुपयोगी, जर्जर भवनों की पहचान कर बनाए पुस्तकालय
डॉ. चौहान ने बताया कि पुस्तकालयों के निर्माण के लिए नए भवन खड़े करने के बजाय गांवों में पहले से मौजूद अनुपयोगी, जर्जर सामुदायिक भवनों अथवा अप्रयुक्त स्कूली कमरों की पहचान की गई। इन भवनों की मरम्मत कर उन्हें आधुनिक पुस्तकालयों में परिवर्तित किया जा रहा है। प्रत्येक पुस्तकालय में कंप्यूटर, ब्रॉडबैंड आधारित इंटरनेट तथा डिजिटल अध्ययन की सुविधाओं का प्रावधान किया गया है। इस कार्य को सिरे चढ़ाने में जिला परिषदों की भी अहम भूमिका रही है।