करनाल। शहर की वाल्मीकि बस्ती के एक घर में संदिग्ध हालात में एक बच्चा मिला है। इसे एक दंपति ने बिना बताए अपने घर में पिछले चार माह से रखा हुआ था। सूचना पर संस्था फाइट फार जस्टिस क्लब आफ इंडिया ने इस बच्चे का पता लगाया और बुधवार देर शाम चाइल्ड हेल्पलाइन को बच्चा सौंप दिया। पुलिस इस मामले में कार्रवाई में जुटी है। बच्चा कौन है, कहां से है, कोई नहीं जानता। दो से ढाई साल की उम्र यह बच्चा कुछ भी बता पाने में समक्ष नहीं हैं।
28 दिसंबर 2013 को सरकारी अस्पताल में सिक्योरिटी गार्ड के तौर पर कार्य करने वाली बेबी को यह बच्चा अस्पताल में मिला। उसने बताया कि जब उसे यह बच्चा मिला तो उसके हाथ में एक स्लिप थी, जिस पर लिखा था कि जिसे भी यह बच्चा मिले वह इसे पाल ले। उसकी पहले से दो बेटियां थी। वह इस बच्चे को अपने घर ले गई और इसके बारे में किसी को बताया तक नहीं है। उस समय उसका पति सतीश किसी काम से बीकानेर गया हुआ था। वापस आकर उसने सारी कहानी उसे बताई, लेकिन इसके बावजूद भी उन्होंने इस बच्चे के बारे में न तो ज्यादा पता किया और न ही इसकी जानकारी पुलिस को ही दी।
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कृष्णा की आशंका के चलते मिला बच्चा
शहर से एक फरवरी को एक ढाई साल का बच्चा कृष्णा लापता है। उसके परिजन कृष्णा के लिए कई बार सचिवालय, विधायक निवास और शहर में कई जगह प्रदर्शन कर चुके हैं, लेकिन अभी तक बच्चे का सुराग नहीं लगा। फाइट फार जस्टिस क्लब आफ इंडिया ने कृष्णा के न मिलने के मुद्दे को उठाया था। संस्था के चेयरमैन एडवोकेट हरीश आर्य को किसी ने सूचना दी कि शहर की वाल्मीकि बस्ती में इतनी ही उम्र का एक बच्चा रह रहा है और यह कृष्णा हो सकता है। कृष्णा के मिलने की उम्मीद से एडवोकेट हरीश आर्य जब मौके पर पहुंचे तो इस नए मामले का खुलासा हुआ।
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बच्चा चाइल्ड हैल्पलाइन को सौंपा
एडवोकेट हरीश आर्य और आरटीआई एक्टविस्ट एडवोकेट राजेश शर्मा ने इस बच्चे को फिलहाल दंपती से लेकर चाइल्ड हेल्पलाइन को सौंप दिया गया है। इसके माता पिता की तलाश के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि कानून के मुताबिक कोई भी इस तरह से बच्चे को अपने पास नहीं रख सकता है। हालांकि इस दंपति की मंशा गलत नहीं लग रही है, लेकिन यह पता लगाना जरूरी है कि बच्चा किसका है और क्यों छोड़ दिया गया।