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बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा नहीं, इंसाफ चाहिए

Thu, 11 Aug 2016 12:17 AM IST
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
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प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश में पिछले तीन सालों से परीक्षाओं और डिग्री के लिए भटक रही एएनएम और जीएनएम की छात्राओं ने बुधवार को सीएम सिटी पहुंचकर सरकार के खिलाफ के खिलाफ नारेबाजी की। छात्राओं ने कर्ण पार्क से लघु सचिवालय तक रोष मार्च निकालकर एसडीएम के मार्फत सीएम के नाम ज्ञापन सौंपा। छात्राओं ने कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकार एक तरफ तो बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के नारे लगा रही है, वहीं दूसरी ओर प्रदेशभर से करीब 15 हजार बेटियां जो पिछले तीन सालों से परीक्षाओं के आयोजन व डिग्री लेने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों व स्वास्थ्य विभाग व मंत्रियों के कार्यालय व आवास पर जाकर अपना दुखड़ा सुना रही हैं, उनके प्रति सरकार का कोई ध्यान नहीं है।
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एएनएम व जीएनएम की छात्राओं ने एक सुर में कहा कि हमें बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ के खाली नारे नहीं, इंसाफ चाहिए। जिसकी वजह से उनकी परेशानियां बढ़ी हैं, सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई करे तथा प्रदेश में एएनएम व जीएनएम की परीक्षाएं आयोजित करवाए। इसके अलावा जिन सेमेस्टरों का परीक्षा परिणाम घोषित हो चुका है, उन विद्यार्थियों को जल्द से जल्द मार्कशीट मुहैया कराई जाए। छात्राओं ने कहा कि सरकार द्वारा यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गई तो वे पूरे प्रदेश सरकार की शिक्षा विरोधी नीतियों के खिलाफ आंदोलन शुरू करेंगी।

एएनएम व जीएनएम की छात्राएं बुधवार को पूर्व निर्धारित शेड्यूल के मुताबिक कर्ण पार्क में एकत्रित हुईं। जहां स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया के छात्र व प्रतिनिधियों ने उनकी इस आंदोलन को सफल बनाने का भरसक प्रयास किया। सुबह करीब 10 बजे से लेकर दोपहर को 12 बजे तक कर्ण पार्क में मीटिंग करने के बाद छात्राओं ने हाथों में बैनर और स्लोगन लेकर लघु सचिवालय की ओर कूच किया। छात्राओं ने दोपहर को एक बजे लघु सचिवालय पहुंचकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। एसएफआई के प्रदेश सेक्रेटर सुमित ने कहा कि सरकार एक तरफ तो डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने व बेटियों को शिक्षित करने के दावे कर रही हैं। वहीं दूसरी तरफ सरकार द्वारा इस बार देश के बजट से शिक्षा बजट को बढ़ाने की बजाए 5.2 प्रतिशत से घटाकर 3.2 प्रतिशत कर दिया है। इससे स्कूलों व कॉलेजों में विकासात्मक कार्यों के लिए अभी तक बजट नहीं मिला है। छात्राओं ने पिछले साल जुलाई में हुए धरने प्रदर्शन के दौरान बने झूठे मुकदमे वापस लेने की भी मांग की। प्रदेश में नर्सिंग की भर्ती निकालने व इसके चयन के लिए एक अलग से बोर्ड बनाने की भी मांग की है।
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पांच सौ से अधिक छात्राओं ने लिया हिस्सा
अपनी मांगों को लेकर प्रदेशभर से करीब 500 एएनएम व जीएनएम छात्राएं सीएम सिटी पहुंची। कर्ण पार्क में एकत्रित होने के बाद नर्सिंग छात्राओं ने पहले तो सीएम कैंप कार्यालय के घेराव की योजना बनाई, लेकिन भारी पुलिस बल को देखते हुए एसएफआई व एएनएम, जीएनएम छात्राओं ने अपना प्लान बदलकर एसडीएम को ज्ञापन सौंपने की योजना बनाई। सभी छात्राओं ने करीब दोपहर एक बजे लघु सचिवालय पहुंचकर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा।

क्या है मामला
प्रदेश के विभिन्न कॉलेजों में पढ़ने वाली एएनएम व जीएनएम की करीब 15 हजार छात्राओं की पिछले तीन साल से परीक्षाएं आयोजित नहीं हुई हैं। पिछले वर्ष भी जुलाई में छात्राओं के लगातार धरने प्रदर्शन करने के बाद सरकार द्वारा परीक्षाएं आयोजित की गई थी। जिनका परिणाम जनवरी 2016 में घोषित किया गया था, लेकिन अभी तक विद्यार्थियों को मार्कशीट नहीं मिली है। वहीं नर्सिंग कोर्स करवा रहे शिक्षण संस्थानों ने भी अब उन विद्यार्थियों से अतिरिक्त फीस लेने का खेल शुरू कर दिया है। इससे प्रदेश की हजारों एएनएम व जीएनएम की छात्राओं व उनके अभिभावकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

वर्जन
एएनएम और जीएनएम की परीक्षाओं का आयोजन कराना स्वास्थ्य विभाग व संबंधित विश्वविद्यालय का मामला है। छात्राओं ने जो शिकायत प्रशासन को दी है, उसे सरकार तक पहुंचाया जाएगा। इस पर सरकार का जो भी फैसला होगा, उसी के मुताबिक की आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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- योगेश कुमार, एसडीएम करनाल।
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