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एसडीएम कार्यालय का घेराव करने पहुंचीं आंगनबाड़ी वर्कर्स

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संवाद न्यूज एजेंसी
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इंद्री। मांगों के समर्थन में हड़ताल के 45वें दिन आंगनबाड़ी वर्कर्स शुक्रवार को इंद्री के एसडीएम कार्यालय का घेराव करने पहुंचीं जिन्हें तहसील के मुख्य द्वार पर ही पुलिस ने बैरिकेड लगाकर आगे बढ़ने से रोक लिया। जहां उन्होंने करीब 50 मिनट तक सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। तहसीलदार सुरेश कुमार को उन्होंने मांगों का ज्ञापन सौंपा और वापस रवाना हो गए। विधायक के नाम ज्ञापन सौंपने के लिए आंगनबाड़ी कर्मियों का प्रतिनिधिमंडल सिंचाई विभाग के कार्यालय में भी पहुंचा, जहां विधायक के प्रतिनिधि को ज्ञापन सौंपा गया।
आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स यूनियन के बैनर तले वे शुक्रवार सुबह इंद्री के हर्बल पार्क में एकत्रित हुए। जहां से वे करीब 12 बजे प्रदर्शन करते हुए ज्ञापन देने के लिए एसडीएम कार्यालय की तरफ रवाना हुए। प्रदर्शन की अध्यक्षता यूनियन की प्रधान रूपा राणा और संचालन जिला सचिव बिजनेश राणा ने किया।
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उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा 2018 में कुशल को 1500 व अकुशल को 750 रुपये वेतन बढ़ाकर देने की बात कही थी। जिसे आज तक सरकार ने पूरा नहीं किया। पिछली वार्ताओं में मंजूर हुई कई मांगें भी लंबित हैं। इस अवसर पर सीटू जिला प्रधान सतपाल सैनी, सुदेश राणा, पूनम गगसीना, रमेश चंद, अंकित राणा, अजमेर सिंह, जयप्रकाश, सतपाल, नरेश कुमार, बिमला, ममता रानी, सविता रानी, मास्टर बलराज सिंह, बबीता और निर्मला मौजूद रहे।
हठधर्मिता छोड़कर मांगें माने सरकार
जिला प्रधान रूपा राणा ने कहा कि सरकार अपनी हठधर्मिता छोड़े और सभी मांगों को माने। आंगनबाड़ी वर्कर्स करीब पिछले डेढ़ महीने से सर्दी में अपने परिवार को छोड़कर अपने हकों की लड़ाई लड़ रही है लेकिन सरकार उनसे बात करने के लिए तैयार नहीं है। प्रदर्शन में जिले भर से सैकड़ों आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स ने भाग लिया। जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। पुलिस की ओर से तहसील गेट पर बैरीकेड और वाटर कैनन लगाए गए थे।
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बर्खास्तगी करके आवाज दबाना चाहती है सरकार
सरकार की ओर से करनाल की पांच आंगनबाड़ी वर्कर्स को बर्खास्त किया गया है। जिला सचिव बिजनेश राणा का कहना है कि सरकार ऐसा करके उनकी आवाज दबाना चाहती है। हड़ताल व प्रदर्शन करना कर्मचारी का अधिकार है। इस तरह की कार्रवाई गलत निर्णय है।
ये हैं मुख्य मांगें
- मुख्यमंत्री की ओर से 29 दिसंबर को की गई घोषण ज्यों की त्यों लागू हों।
- प्रधानमंत्री द्वारा सितंबर 2018 में की गई वेतन बढ़ोतरी एरियर सहित मिले।
- रिटायरमेंट से पूर्व साधारण दुर्घटना होने पर इलाज का पूरा खर्च मिले और मृत्यु होने पर अन्य विभागों की तर्ज पर तीन लाख रुपये एक्सग्रिशया मिले।
- विभाग की ओर से ऑनलाइन काम का विकल्प दिया जाए, नई शिक्षा नीति वापस हो।
- आईसीडीएस में किसी भी एनजीओ या प्राइवेट संस्था को शामिल करने की अनुमति न दी जाए।
- सरकारी कर्मचारी का दर्जा न देने तक आउटसोर्स पॉलिसी का कर्मचारी मानते हुए मानदेय में बढ़ोतरी की जाए।
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