फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आंगनबाड़ी : केंद्रों के बेहतर संचालन, मेहनताने और जीवन सुरक्षा का हक मांग रही आंगनबाड़ी वर्कर

विज्ञापन
विज्ञापन
करनाल। केंद्रों के बेहतर संचालन, मेहनताने और जीवन सुरक्षा के हक के लिए करीब तीन हजार आंगनबाड़ी कर्मी और सहायिकाएं सीएम सिटी में 18 दिनों से हड़ताल पर हैं। सभी 1565 केंद्रों को बंद कर वे लघु सचिवालय के समक्ष धरने पर डटी हैं। लेकिन, उनकी मांगों पर न सरकार ध्यान दे रही है ना ही प्रशासन गौर कर रहा है। हड़ताल के कारण इन केंद्रों से सीधे जुड़े 1.15 लाख बच्चे और गर्भवती महिलाएं सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रही हैं।
विज्ञापन

आंगनबाड़ी वर्कर एवं हेल्पर यूनियन के बैनर तले आठ दिसंबर से हड़ताल शुरू हुई थी। दो बार सीएम से मुलाकात की तिथि निर्धारित हुई। लेकिन, हर बार बात आगे बढ़ती गई। 28 दिसंबर तक उनकी हड़ताल का अल्टीमेटम है और मौखिक तौर पर 29 दिसंबर को सीएम से मुलाकात का आश्वासन मिला है। यूनियन के पदाधिकारियों का कहना है कि वे किसी नई मांग को लेकर हड़ताल पर नहीं हैं। बल्कि मुख्यमंत्री की पुरानी घोषणाओं को लागू करवाने और आर्थिक एवं पारिवारिक सुरक्षा के लिए लड़ाई लड़ रही हैं। 2018 में 22 दिन हड़ताल करने के बाद सीएम ने उनके लिए कुछ घोषणाएं की थी। लेकिन, अब तक लागू नहीं हो पाईं। पिछले दिनों मुख्यमंत्री करनाल आए थे, तो उस समय भी उन्हें मिलने का अवसर नहीं मिल पाया। जब तक मांगें नहीं मानी जाती, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। ब्यूरो
...
ये हैं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की प्रमुख मांगें-
- वर्कर से सुपरवाइजर के रूप में 50 प्रतिशत की पदोन्नति बिना किसी शर्त के लागू हो।
- केंद्रों का बढ़ा किराया ग्रामीण क्षेत्र में 2000, कस्बे में 3000 और शहरों में 5000 रुपये मिले। किराया कम देने पर अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई हो।
विज्ञापन

- वर्कर और हेल्पर की वर्दी की राशि बढ़ाकर 2000 रुपये की जाए।
- ईंधन की राशि बढ़ाई जाए या गैस सिलिंडर विभाग भरवाकर दे।
- वर्कर और हेल्पर को सरकारी कर्मचारी का दर्जा मिले, जब तक दर्जा नहीं मिलता तब तक न्यूनतम वेतन वर्कर को 24 हजार और हेल्पर को 16 हजार रुपये मिले।
- 2018 में की गई घोषणाओं को लागू करते हुए महंगाई भत्ते की सभी किस्त मानदेय में जोड़कर दें और महंगाई भत्ते का बकाया एरियर भी तुरंत मिले।
- विभाग बिना मोबाइल फोन व अन्य संसाधन दिए ऑनलाइन काम न करवाए। इस बारे उच्च न्यायालय के आदेशों का पालन हो।
- प्रधानमंत्री की सिंतबर 2018 में की गई वर्कर की 1500 और हेल्पर की 750 रुपये वेतन की बढ़ोतरी एरियर समेत मिले।
- वर्कर को पांच लाख और हेल्पर को तीन लाख रुपये रिटायरमेंट लाभ और पेंशन दी जाए।
- वर्कर और हेल्पर को प्रशिक्षण या बैठक में बुलाने पर टीए-डीए मिले और 18 किलोमीटर की सीमा खत्म हो।
- वर्कर और हेल्पर को दुर्घटना होने पर इलाज का पूरा खर्च मिले। मृत्यु होने अन्य विभागों की तर्ज पर तीन लाख रुपये मुआवजा और आश्रित को नौकरी मिले।
- नई शिक्षा नीति वापस हो, प्ले वे स्कूल के नाम पर आईसीडीएस का निजीकरण न हो। आईसीडीएस में एनजीओ या प्राइवेट संस्था को शामिल न करें।
- आईसीडीएस में खाली पड़े सभी पदों को भरा जाए और इसकी 6 सेवाओं व 5 उद्देश्य से अलग कोई कार्य न लिया जाए।
- प्रदेश में आंदोलन के दौरान आंगनबाड़ी कर्मियों रोड जाम के दर्ज केस वापस हो।
- वर्कर और हेल्पर को ईएसआई और पीएफ के तहत कवर किया जाए, मेडिकल, सर्दी-गर्मी के अवकाश मिले।
फोटो-- 121
सभी केंद्र बंद हैं, 18 दिनों से लघु सचिवालय के सामने बैठे हैं, लेकिन किसी अधिकारी ने हमारी मांग नहीं सुनी। सीएम करनाल आए तो भी नहीं मिलवाया। - बिजनेश राणा, जिला सचिव
फोटो-- 122
सरकार स्नातक, एमए और बीएड वर्करों को स्कूलों में शिक्षक लगाए तो जेबीटी स्केल पर लगाए, न कि आंगनबाड़ी स्केल पर नियुक्ति दे। - नीलम कुमारी, उपप्रधान, करनाल खंड
फोटो--- 123
वेतन भी समय पर नहीं मिलता, पिछले माह भी वेतन नहीं मिला। वेतन आने की तिथि निर्धारित नहीं है। कई बार दो-दो माह बाद वेतन मिलता है। - रेखा, प्रधान इंद्री
फोटो-- 124
महंगाई भत्ते की करीब पांच किस्त बकाया हैं। कई बार इस मांग को लेकर ज्ञापन सौंपे। अब हड़ताल पर जाना मजबूरी बन गई थी। - नरेश कुमारी, कोषाध्यक्ष इंद्री
फोटो-- 125
हड़ताल के कारण केंद्र बंद होने से गर्भवती महिलाओं और बच्चों को परेशानी हो रही है। सरकार हठ पर अड़ी है, जबकि हमारी मांगे सरकार की घोषणाओं को पूरा करना है। - सुनीता, निसिंग
फोटो-- 126
पीएमएमवाई योजना के तहत प्रति फार्म के हिसाब से वर्कर और हेल्पर को पैसे मिलते हैं। लेकिन 2015 से असंध खंड का भुगतान नहीं हुआ। -भरपाई देवी, असंध
फोटो-- 127
कई महीनों से बढ़ा हुआ किराया नहीं मिला है। वर्कर केंद्रों का किराया खुद भरने को मजबूर हैं। हमारी मांगें केंद्रों के बेहतर संचालन के लिए ही हैं। - सुदेश, नीलोखेड़ी
फोटो-- 128
केंद्रों में खाना पकाने के लिए ईंधन नहीं है। गैस सिलिंडर भी खुद भरवाने पड़ रहे हैं। न ही पूरे पैसे दिए जा रहे हैं। - रीना, करनाल खंड
वर्जन-
आंगनबाड़ी वर्कर एवं हेल्पर की मांगें सरकार के संज्ञान में हैं। उनके मांग पत्र भी सरकार तक पहुंचा दिए हैं। जल्द यूनियन के प्रतिनिधिमंडल की बातचीत करवा दी जाएगी। - निशांत कुमार यादव, डीसी करनाल।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें