सरकार लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लाख दावे कर रही है, लेकिन इन दावों की हकीकत कुछ और ही है। सीएम सिटी में बीमारी से पीड़ित लोगों को घर से अस्पताल या उच्चतर अस्पतालों में जाने के लिए समय पर एंबुलेंस नहीं मिल पाती। वहीं निजी एंबुलेंस संचालक मोटी रकम ले रहे हैं। जिले में एंबुलेंस सेवा का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिले में कुल 18 एंबुलेंस हैं, जिनमें चार पिछले काफी समय से कंडम घोषित की जा चुकी हैं और चार एंबुलेंस पिछले आठ दिनों से खराब खड़ी हैं।
एक एंबुलेंस को वीआईपी ड्यूटी के लिए रिजर्व रखा जाता है। अगर शहर में कहीं कोई वीआईपी कार्यक्रम हो जाए तो हर कार्यक्रम में एक एंबुलेंस को भेजा जाता है, जबकि विभाग के पास पिछले दो माह से आठ नई एंबुलेंस आई हुई हैं। अभी तक कागजी प्रक्रिया में उलझी हुई हैं। अब मरीजों के लिए केवल नौ एंबुलेंस ही बचती हैं। ऐसे में अधिकतर मरीजों को प्राइवेट वाहनों की सहायता से ही अस्पताल तक पहुंचना पड़ता है।
15 लाख की है आबादी
जिले की 15 लाख की आबादी है। यहां लगभग 30 एंबुलेंस की आवश्यकता है। जबकि पूरे जिले का नौ एंबुलेंस से ही काम चलाया जा रहा है। इनमें से भी अगर शहर में किसी वीआईपी का आगमन हो जाता है तो एक एंबुलेंस उनके साथ लगाई जाती है। जिले के सात सीएचसी और 19 पीएचसी सेंटरों पर भी एंबुलेंस की जरूरत है, लेकिन इनमें से भी अधिकतर जगह एंबुलेंस नहीं है। जहां है वह खराब हालत में है। इसका लोगों को कोई फायदा नहीं हो रहा है।
प्राइवेट एंबुलेंस संचालकों का डबल किराया
सरकारी एंबुलेंस सेवा के प्रधान सुरेश ने बताया कि सरकारी एंबुलेंस की सुविधा न मिलने के कारण लोगों को प्राइवेट एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ता है जोकि मरीजों से डबल किराया वसूलते हैं। सुरेश ने बताया कि सरकारी एंबुलेंस में जच्चा बच्चा व दुर्घटना में घायल को सरकार की ओर से फ्री सेवा दी जाती है। जबकि बीमार मरीज के लिए सात रुपये किलोमीटर के हिसाब से किराया लिया जाता है। प्राइवेट एंबुलेंस संचालक मरीजों से डबल किराया वसूलते है। प्राइवेट का चंडीगढ़ का किराया 2500 रुपये है।
तीन लाख किमी की है कैपेसिटी, चल चुकी है ज्यादा
एक एंबुलेंस की कैपेसिटी तीन लाख किलोमीटर की होती है। उसके बाद उसे कंडम घोषित कर दिया जाता है। जिले से सभी एंबुलेंस 2009 की आई हुई है और तीन लाख से ज्यादा चल चुकी है। ऐसे में भगवान भरोसे दौड़ रही एंबुलेंस से कोई बढ़ा हादसा भी हो सकता है। ऐसे में मरीजों की जान रामभरोसे है।
समय पर नहीं मिलता तेल
जिले की मौजूदा एंबुलेंस भी कई बार बिना तेल के खड़ी रहती हैं। ड्राइवरों का कहना है कि पेट्रोल पंप का बिल ज्यादा होने के कारण पंप संचालक तेल देने से कई बार मना कर देता है। ऐसे में एंबुलेंस खड़ी रहती है। इस कारण चालकों के साथ साथ मरीजों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
102 पर फोन करने पर भी नही मिलती एंबुलेंस
बुधवार को कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कालेज में शिव कालोनी से आए नीतिश ने बताया कि उसका रिश्तेदार दयाल सिंह तीन दिन से अस्पताल में दाखिल है। आज उसे पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया है। जब 102 पर फोन करके एंबुलेंस के बारे में पूछा तो जवाब मिला की एंबुलेंस नही है। इसके लिए 2 घंटे इंतजार करना पड़ेगा। वहीं बसताड़ा वासी राधे ने बताया कि वह रीतु को लेकर आया है। जिसको बच्चा हुआ है। लेकिन 102 पर एंबुलेंस के लिए पूछा तो उन्होंने कहा नहीं है। डेढ़ घंटे बाद आएगी। ऐसे में उन्हें प्राइवेट वाहन की सहायता से जाने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
वर्जन
जनसंख्या को देखते हुए 30 एंबुलेंस की जरूरत है। इस समय जिले में 18 एंबुलेंस हैं, जिनमें से चार कंडम है और चार कुछ दिनों से खराब है। आठ एंबुलेंस नई आई हुई है। जिनकी कागजी प्रक्रिया चली हुई है। जल्द ही वह भी चालू हो जाएंगी।
-गोपाल-फ्लीट मैनेजर 102
वर्जन
कुछ कागजी प्रक्रिया गाड़ियों को लेकर पूरी की जानी है। इस सप्ताह नई गाड़ियों को चलाया जाएगा। इसके साथ ही खराब गाड़ियों को ठीक कराने के निर्देश दिए गए हैं। इस बारे में नोडल अधिकारी से बात करेंगे और जल्द ही इसका समाधान कराएंगे।
- संतलाल वर्मा, सीएमओ